
रिवाजपुर में डस्टबिन बनाए जाने के विरोध में ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे हैं। अभी तक दोनों पक्षों में समझौता नहीं हो सका है। उधर, सोमवार को पार्षद ने कहा था कि 15 माह से विकल्प के तौर पर गांव बनाया जा रहा है, जबकि ग्रामीण इससे इनकार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। रिवाजपुर समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष नाहर सिंह चौहान और सेब फरीदाबाद संस्था के अध्यक्ष पारस भारद्वाज ने कहा कि आंदोलन को कमजोर करने की साजिश के तहत ऐसा किया गया है। पारस भारद्वाज ने कहा कि आंदोलन कमजोर नहीं होगा। जनता ने क्षेत्र के कुछ इच्छुक लोगों को अपना प्रतिनिधि बनाकर प्रशासन से बातचीत कर समाधान निकालने के लिए भेजा था, लेकिन इस बैठक में कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
आपको बता दे कि रिवाजपुर निवासी नाहर सिंह चौहान और माला चौहान ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी कीमत पर गांव में कूड़ेदान का निर्माण नहीं होने देंगे। सरकार के सहयोग से लैंडफिल के लिए वैकल्पिक जमीन तलाशने का प्रयास किया जा रहा है। समिति के सदस्यों को पूर्ण विश्वास है कि इसका शांतिपूर्ण समाधान अवश्य निकलेगा। ताकि उनके गांव में कूड़ा डंप भी न बने और कूड़ा निस्तारण की सरकार की समस्या का भी समाधान हो सके। 19 मई को निगम अधिकारियों के साथ बैठक होगी।
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