
जनता को अच्छा इलाज और सस्ते में दवाई देने की बात आए दिन झूठी साबित होती नज़र आ रही है, क्योंकि सरकार ये वादे पूरे नहीं कर पा रही है। दरअसल बल्लभगढ़ के सरकारी अस्पताल में पिछले एक साल से एंटीरेबीज का इंजेक्शन नहीं है। जिस वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बता दें कि फिलहाल मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से ये एंटीरेबीज इंजेक्शन ख़रीदने पड़ रहे है, जोकि उन्हें 300 रुपये की पड़ रही है। वही सरकारी अस्पताल में ये इंजेक्शन 100 रुपये का मिल जाता है और BPL कार्ड धारको को यह इंजेक्शन मुफ्त मिल जाता है। लेकिन अस्पताल में न होने की वजह से मरीजों को बाहर से ही इंजेक्शन लेना पड़ रहा है, जिस वजह से उनकी जेब पर काफ़ी जोर पड़ रहा है। क्योंकि एंटीरेबीज का इंजेक्शन एक साथ चार लगवाने पड़ते है।
जानकारी के लिए बता दें कि सर्दी के मौसम में कुत्ते, बंदर ज़्यादा कटखने हो जाते है। जिस वजह से अस्पताल में रोज़ाना 7-8 मरीज़ कुत्ते और बंदर के काटने के आ रहे। लेकिन प्रशासन फिर भी कोई सुध नहीं ले रहा है। वह न तो अस्पताल में इंजेक्शन भिजवा रहा है और न ही इन आवारा कुत्ते, बंदरो को पकड़ने के लिए कोई अभियान चला रहा है।
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