
हम अक्सर अख़बार को पढ़कर रद्दी में ये सोच कर फ़ेक देते है, कि वह अब हमारे किसी काम का नहीं है। लेकिन Surajkund मेले में ओडिसा से आए अरुण कुमार पुराने अख़बार के साथ ऐसा अनोखा काम करते है जिसके बारे में हम सोच भी नहीं सकते। दरअसल वह इन रद्दी अखबारों से हैण्डीक्राफ्ट आइटम बनाते हैं, जैसे पेन होल्डर, की चैन, वॉल हैंगिंग, लेडीज़ पर्स, पेंटिंग, और ज्वैलरी बॉक्स आदि।
बता दें कि उन्होंने पेपर माशे की इस कला को साल 2000 में सीखा था और आज वह अपनी इस कला को अपनी युवा पीढ़ी तक पहुंचा रहे है, इसके लिए उन्होंने एक स्कूल खोला हुआ है। इसी के साथ बता दें कि वह बच्चो को सिखाने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण के लिए भी काम करते है। क्योंकि उन्होंने अपने काम करवाने वाले स्टाफ में 90% स्टाफ महिलाओं का रखा हुआ है।
जानकारी के लिए बता दें कि अपनी इस कला के लिए उन्हें साल 2010 में राज्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें उनकी इस कला के लिए ओडिसा सरकार ने Surajkund मेले में हिस्सा लेने के लिए भेजा है और वह पहली बार किसी अंतर्राष्ट्रीय मेले में हिस्सा ले रहे हैं।
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