
ग्रेटर फरीदाबाद को एक आधुनिक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित शहर के रूप में विकसित करने का सपना दिखाया गया था, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग नजर आ रही है। दरअसल सेक्टर 75 से लेकर 89 तक फैली हाईराइज सोसाइटियों में रहने वाले हजारों परिवार आज भी सुरक्षा को लेकर परेशान हैं। क्षेत्र में कम आबादी, खाली प्लॉट और वीरान सड़कें ऐसे हालात बना रही हैं, जिनका फायदा असामाजिक तत्व खुले तौर पर उठा रहे हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि दिन के समय भी कई सड़कें ऐसी हैं जहां लोगों का आना-जाना कम होता है। इसी का फायदा उठाकर झपटमारी, मोबाइल चोरी और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। बता दें हाईराइज सोसाइटियों के भीतर तो निजी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है, लेकिन एक बार बाहर कदम रखते ही लोग असुरक्षित महसूस करने लगते हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि शाम ढलते ही कुछ इलाके पूरी तरह सुनसान हो जाते हैं, जहां महिलाओं का अकेले निकलना जोखिम भरा होता है। पुलिस की पेट्रोलिंग बेहद कम होती है और कई बार तो पूरी रात कोई गश्ती वाहन दिखाई नहीं देता। इसका सीधा असर यह है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और वारदातों के बाद भी वे बेधड़क घूमते नजर आते हैं।
यहां के लोगों की मांग है कि पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, खासकर संवेदनशील सड़कों और सुनसान इलाकों में कैमरे लगाए जाएं, ताकि अपराध पर अंकुश लगाया जा सके। ग्रेटर फरीदाबाद की छवि को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए ज़मीन पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
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