
शहर की फिज़ा दिनों-दिन और खराब होती जा रही है। शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 190 के पार पहुंच गया, जो साफ संकेत है कि हवा अब “मध्यम” की श्रेणी से फिसलकर “खराब” के दायरे में आ चुकी है। बावजूद इसके, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दिशा-निर्देशों का पालन न किए जाने से स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रदूषण में बढ़ोतरी के पीछे सिर्फ ट्रैफिक या निर्माण कार्य जिम्मेदार नहीं हैं। पटाखों का जलना, तंदूर से निकलता धुआं, और कचरे को खुले में जलाने जैसी गतिविधियां भी हवा की सेहत पर भारी पड़ रही हैं। खासकर त्योहारी मौसम की दस्तक के साथ इन गतिविधियों में तेजी आई है, जिससे वातावरण लगातार जहरीला होता जा रहा है।
इस बिगड़ते माहौल का सबसे ज्यादा असर कमजोर वर्गों—बुजुर्गों, बच्चों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे मरीजों पर पड़ रहा है। शहर के कई हिस्सों से आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा देखा गया है।
प्रशासन की ओर से लागू किए गए GRAP के नियमों के बावजूद कई जगहों पर नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। कुछ क्षेत्रों में कूड़ा खुले में जलाया जा रहा है और निर्माण स्थलों पर सामग्री को ढंका नहीं जा रहा, जिससे सड़कें धूल से अटी पड़ी हैं। वहीं, पटाखों पर लगे प्रतिबंध के बावजूद इनका इस्तेमाल लगातार जारी है।
चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है। उन्होंने खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को जरूरी न हो तो घर के भीतर ही रहने की सलाह दी है।
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