
दिल्ली-एनसीआर व फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है और इसके चलते वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) का दूसरा चरण लागू कर दिया है। इसके बावजूद कई इलाकों में खुले तंदूर और कोयले-लकड़ी से चलने वाले भट्ठियों का प्रयोग जारी है, जिससे प्रदूषण और बढ़ रहा है।
ग्रेप के पहले चरण में ही होटलों और स्ट्रीट फूड स्टालों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाती है, लेकिन एनआईटी-एक मार्केट और रेलवे रोड जैसे प्रमुख क्षेत्रों में इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। बल्लभगढ़ और ग्रेटर फरीदाबाद में भी कई ढाबों पर खुले भट्ठी का इस्तेमाल देखा गया।
सड़कों की टूटी हालत और धूल-मिट्टी के कारण भी हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है। ग्रेटर फरीदाबाद के कुछ इलाकों में रात के समय कूड़ा जलाने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इन परिस्थितियों में ग्रेप की पाबंदियों का असर जमीन पर अभी दिखाई नहीं दे रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए नगर निगम की टीम लगातार निगरानी कर रही है। निगम ने कूड़ा जलाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही, धूल मिट्टी वाली सड़कों पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल के जरिए हवा की गुणवत्ता सुधारने की कोशिशें जारी हैं।
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