यह किसी से अंजान नहीं कि भारत में किसानों को देवता माना जाता है। किसान दिन-रात एक कर फसल बोता है, लेकिन गत हफ्ते लगातार बारिश होने से ओखला बैराज में जलस्तर बढ़ने के बाद यमुना में पानी छोड़ दिया गया है। फरीदाबाद में सोमवार को 25 हजार क्यूसिक पानी नदी में बह रहा था। अभी भी पानी घेरे से बाहर नहीं निकला है, हालांकि नदी की तलहटी में लगाई गई सब्जी की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई है।
बारिश हमारे नियंत्रण में तो नहीं है, लेकिन प्रशासन किसानों की मदद तो कर ही सकता है। गर्मी के मौसम में यमुना का पानी एक नहर और रजवाहे की तरह सीमित क्षेत्र में बहता है। यमुना का पूरा तल खाली होता है।

किसी भी सरकार की पहली पप्राथमिकता किसानों के बारे में सोचने के लिए होनी चाहिए। जिन किसानों की जमीन यमुना में है, वे यहां पर सब्जी की फसल लगा देते हैं। इस वर्ष भी किसानों ने यमुना की तलहटी में घीया, पेठा, करेला, भिडी, परमल, खीरा, हरी मिर्च लगाई हुई थी।
इंद्र देवता से सभी दुआऐं तो अनेकों करते हैं, लेकिन बारिश से मुसीबत जब आती है तो सभी परेशान हैं। दिल्ली-एनसीआर में पिछले सप्ताह अच्छी बारिश हुई है, जिससे ओखला बैराज पर जलस्तर काफी बढ़ गया। ओखला बैराज से 25 हजार क्यूसिक पानी फरीदाबाद की सीमा में छोड़ा गया। पानी आने से हजारों किसानों की सब्जियों की फसल बर्बाद हो गई है।
यमुना का पानी भी नीला नज़र आने लगा है। स्थिति बाढ़ जैसी बन गई है। प्रशासन ने यमुना किनारे बसे गांवों में मुनादी करा दी है। खेतों पर रहने वाले किसानों को गांवों में घर जाने के लिए कहा गया है। यह भी निर्देश दिए हैं कि कोई भी बच्चा व व्यक्ति यमुना की तरफ न जाए। जिले में कोरोना का प्रहार भी थमने को तैयार नहीं है।
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