हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला चाहते थे कि की पंचायतीराज व्यवस्था में परिवर्तन लाया जाए . हरियाणा देश का पहला राज्य बने जहां पर काम न करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को वापस घर बिठाने की पॉवर ग्रामीणों के पास हो. बुधवार से शुरू हो रहे हरियाणा विधानसभा के मॉनसून सत्र में बिल पेश किया जाना था
लेकिनहरियाणा सरकार का राइट-टू-रिकॉल विधेयक इस बार विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश नहीं हो सका है। सरकार का प्रयास था कि राइट-टू-रिकॉल की व्यवस्था पंचायत राज में जल्द से जल्द लागू हो।

हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने गुरुवार को कहा कि विधानसभा के मॉनसून सत्र में बुधवार को राइट-टू-रिकॉल विधेयक पेश किया जाना था, लेकिन मंत्रियों का मानना था कि अन्य समान मुद्दे थे जिन पर चर्चा करने की आवश्यकता थी। इस कारण इस मामले को अगले विधानसभा के अगले सत्र में उठाने की योजना बनाई गई है।
बीते दिनों दुष्यंत चौटाला ने कहा था कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी देवीलाल का सपना था कि पंचायत राज में राइट-टू-रिकॉल व्यवस्था हो, जिससे जनता के पास काम न करने वाले प्रतिनिधि को हटाने का अधिकार भी हो।
इसके साथ-साथ सरकार पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण ही नहीं अपितु बराबर की भागीदारी देने की व्यवस्था करने का काम करेगी, जिसके तहत पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की 50 फीसदी हिस्सेदारी होगी।
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