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कैसे फर्जी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने से फरीदाबाद के एक परिवार का जीवन हुआ अस्थ – व्यस्त

कोरोना की फर्जी पॉजिटिव रिपोर्ट आने से किस प्रकार एक परिवार के लोगों का जीवन कुछ दिनों के लिए भयावह बन गया ऐसा एक मामला फरीदाबाद के सेक्टर 19 से सामने आया है। कुछ दिनों पहले सेक्टर 19 निवासी मसाला उत्पादक रामगोपाल कंसल पेट में दर्द की शिकायत लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचे थे जहां पर अस्पताल में डॉक्टरों के कहने पर उनका कोरोना की जांच के लिए भी सैंपल लिया गया जिसकी जांच एक निजी लैब में हुई ओर रामगोपाल की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव पाए गईं।
जिसके बाद रामगोपाल ओर उनके परिवार के सभी लोगो को क्वॉरेंटाइन कर लिया गया लेकिन बाद में जब सरकारी अस्पताल आईएसआईसी में भर्ती होने के बाद सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों ने अपने स्तर कर उनके एवं उनके परिवार के लोगों की कोरोना पॉजिटिव होने की जांच की दोनो रिपोर्ट में उन्हें नेगेटिव पाया गया।

रामगोपाल ने निजी लैब की लापरवाही के कारण उनके साथ हुई इस भयावह घटना के बारे में बताते हुए कहा कि निजी लैब द्वारा फर्जी रिपोर्ट दिए जाने के बाद उनके पूरे परिवार में मायूसी छा गई और उनका पूरा एक हफ्ता भयावह प्रताड़ना से गुजरा। क्यूंकि रामगोपाल की रिपोर्ट आने से पहले वे अपनी पत्नी सुनीता कंसल, बेटे अखिल, पुत्र वधू संध्या, पौते माधव एवं राघव, भाई विजय कुमार सहित कुल 58 लोगो के सीधे संपर्क में आए थे जिसके बाद उन सब लोगो को क्वॉरेंटाइन किया गया था।

रामगोपाल ने बताया कि इस दौरान कुछ लोगो द्वारा सोशल मीडिया पर उनके निधन की खबर को भी जमकर शेयर किया गया लेकिन भगवान की दुआ से बिल्कुल ठीक है।
लेकिन इस फर्जी रिपोर्ट के परिणामस्वरूप उन्हें बेवजह अस्पताल में कोरोना के मरीजों के बीच रहना पडा जिस कारण अब उन्हें अपने घर में रहते हुए भी अपने परिवार के सदस्यों से अलग रहना पड रहा है।

इस फर्जी रिपोर्ट के खिलाफ कार्यवाही करते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा निजी लैब को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है जिसमें लैब से सवाल किया गया है की उनके द्वारा किस आधार पर बुजुर्ग रामगोपाल एवं उनके भाई को कोरोना पॉजिटिव घोषित किया गया था।

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