
डॉ. एकनाथ ने कहा कि डिजिटलाइजेशन कभी भी एक चुनौती नहीं थी। हम पहले से ही ऑनलाइन कक्षाएं चला रहे थे। शुरुआती दौर में सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचना कठिन था लेकिन 10-15 दिनों के भीतर हमने इसे संभाल लिया।
डॉ. उल्हास शिउर्कर ने कहा कि हमने गूगल मीट के साथ शुरुआत की और फिर गूगल क्लासरूम पर व्याख्यान अपलोड करना शुरू किया। इससे विद्यार्थियों को फायदा हुआ।
श्रीदेवी सिरा ने कहा कि प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान के लिए प्रौद्योगिकी लाभदायर है
और लॉकडाउन के दौरान इसका लाभ मिला है। इसमें शिक्षकों की भूमिका भी सराहनीय है।चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के बलविंदर सोही ने कहा कि विश्वविद्यालय ने ब्लैकबोर्ड नामक एक मंच स्थापित किया, जिसमें छात्रों को सभी विषयों के लेक्चर अपलोड किए जाते थे।
छात्रों के लिए एक शिकायत प्रकोष्ठ भी स्थापित किया और छात्रों के सामने आने वाली चुनौतियों का पता लगाने के लिए अपने फैकल्टी के साथ व्यापक परामर्श कर काम किया। जिसका सार्थक परिणाम आया।
AITMC के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रीत संधू सिहाग ने अंत में कहा कि इस वेबकास्ट सीरीज के जरिये युवाओं को लॉकडाउन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद करना है।
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