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बदलते इंडिया में बदला सत्ता दल पार्टियों की ओछी राजनीति का तरीका, मैदान छोड़ सोशल मीडिया पर छेड़ी जंग

कहते हैं बदलते वक्त के साथ खुद को बदल लेना भी बहुत जरूरी है। ऐसा इसलिए है कि बदलता वक्त और परिवर्तन नए जीवन की शुरुआत होती है। ऐसे में खुद को अपने आसपास के वातावरण के अनुसार ढाल लेना सबसे उत्तम माना जाता है।

अगर यह तरीका राजनीतिक पार्टी भी आजमाने लगे तो सोचिए फिर डिजिटल इंडिया में डिजिटल राजनीति करने का तरीका कैसा होगा।

अगर आपने अभी तक डिजिटल राजनीति के बारे में नहीं सुना है, तो एक बार भारतीय नेताओं से मिलिए जो अब सड़क से निकल सोशल मीडिया पर राजनीति की जंग में किस तरह देश की रीढ़ यानी किसानों को मुद्दा बनाकर एक दूसरे पर आरोप- प्रत्यारोप का बाण चलाने में जुटें हुए है।

इस बात से हर कोई परिचित है कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया कृषि अध्यादेश किसानों के लिए अहित और विपक्षी पार्टियों के लिए एक तेजी से उछाले जाने वाला मुद्दा बन गया है।

अब इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां जहां अभी तक रैली कर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही थी और किसान के लिए लाए गए कृषि अध्यादेश को मुद्दा बनाकर बखूबी भुनाने का प्रयास कर रही थी। अब यह आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला मैदानी रैलियों की जंग से निकलकर सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड कर रहा है।

अब दोनों दलों के नेता इस अभियान के तहत खेत खलियान से लेकर मंडियों तक पहुंच रहे हैं, और वहां किसानों का वीडियो बनाकर वायरल कर रहे हैं।

ऐसे में बीजेपी भी कहीं पीछे नहीं है। बीजेपी भी किसानों से कानून के समर्थन में एक मिनट का वीडियो बनवा कर सोशल साइट पर अपलोड करने की तैयारी कर रही है।

इसके लिए केंद्रीय राज्य मंत्री ने बीजेपी जिलाध्यक्ष को निर्देश भी दे दिए हैं। इस जंग को जीतने के लिए बीजेपी सरकार अब खेत खलियान में काम करने वाले किसानों को सोशल मीडिया पर लेकर आएगी।

जिस पर प्रदेश बीजेपी जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा ने बताया कि उनकी टीम इस काम में तेजी से जुट गई है, और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता भी इसको लेकर सोशल मीडिया पर शेयर करने में जुटे हुए हैं।

वहीं दूसरी तरफ इस मामले में प्रदेश के कांग्रेस प्रवक्ता सुमित गौड़ ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि बीजेपी सरकार द्वारा लाया गया कोई भी परिवर्तन आमजन को भाया हो।

उन्होंने जीएसटी और नोटबंदी जैसे मुद्दे को उठाकर बोला कि जनता पहले भी इस तरीके के परिवर्तन से नाराज थी और आज भी कृषि अध्यादेश लाने से अपनी नाराजगी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए पेश कर रही है।

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