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किसानों को जोखिम फ़्री बनाने के लिए मनोहर लाल सरकार ने लिए कई अहम निर्णय: जे. पी. दलाल

हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री जे.पी. दलाल ने कहा है कि मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल के नेतृत्व में पिछले छ: वर्षों से किसान एवं किसानी को जोखिम फ्री बनाने के लिए प्राकृतिक आपदा के समय स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों से भी प्रति एकड़ 2000 रुपये अधिक मुआवजा देने सहित कई अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। वर्तमान सरकार जब-जब किसान हित में कोई बड़ा निर्णय लेती है तो कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियों की बोखलाहट बढ़ जाती है।

श्री दलाल ने कहा कि वर्ष 2004-05 में प्राकृतिक आपदाओं से फसलों के नुकसान की भरपाई का मुआवजा 3000 रुपये प्रति एकड़ था जो कांग्रेस सरकार जाते-जाते 6000 रुपये केवल फाइलों में करके गई थी और इसे 2014 में हमारी सरकार ने लागू किया था। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने दरियादिली दिखाते हुए 12,000 रुपये प्रति एकड़ किया, जबकि स्वामीनाथन ने 10,000 रुपये प्रति एकड़ देने की ही की बात कही थी।

उन्होंने कहा कि पिछले 6 वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए 2764 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा वितरित किया है, जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के 2943 करोड़ रुपये के क्लेम से अलग है। उन्होंने कहा कि सरकार के ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने व कृषि लागत मूल्य आयोग द्वारा 2017 से बुआई सीजन से पहले फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने के परिणामस्वरूप न केवल फसलों के अधीन रकबे में निरंतर वृद्घि हो रही है, बल्कि किसानों का रुझान गेहूं, चावल जैसी परम्परागत फसलों की बजाए अधिक लाभकारी मूल्य देने वाली फसलों की ओर बढ़ा है।

श्री दलाल ने कहा कि पिछली सरकार के समय यूरिया खरीद के अग्रिम प्रबन्धन न किए जाने के कारण यूरिया की दिक्कत हुई थी, परंतु सरकार के विवेकपूर्ण प्रबन्धन के चलते समय पर किसानों को खाद वितरित की गई और आज यूरिया, डीएपी व अन्य खादों के पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि यूरिया के मूल्य में भी पहले की तुलना में कमी की गई है। श्री दलाल ने कहा कि सरकार ने एक अनूठी पहल करते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की तर्ज पर हरियाणा सरकार ने अपने स्तर पर ट्रस्ट मॉडल आधार पर सब्जी एवं बागवानी फसलों को भी एक नई बीमा योजना में कवर करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि इस नई बीमा योजना में किसानों को 2.5 प्रतिशत का प्रीमियम देना होगा और उन्हें प्रति एकड़ 40,000 रुपये का बीमा कवर मिलेगा। जिन 14 सब्जियों को इस बीमा कवर में शामिल जाएगा उनमें टमाटर, प्याज, आलू, बंद गोभी, मटर, गाजर, भिण्डी, लौकी, करेला, बैंगन, हरी मिर्च, शिमला मिर्च, फूल गोभी तथा मूली शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, किन्नू, अमरूद, आम तथा बेर व हल्दी तथा लहसून को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा।

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