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नवरात्रि 2020 : क्यो मनाते हैं, नवरात्रि क्या है इसका पौराणिक महत्व

साल में दो नवरात्रि, मनाई जाती है। एक, चैत्र नवरात्र ओर दूसरा ,आश्विन नवरात्र। नवरात्र, के नो दिन व्रत रखकर देव के अलग अलग रूपो की पूजा की अर्चना की जाती हैं। इन नो दिनों तक लोग माता की चौकी बनाकर अपने घर में विराजमान करते हैं।

इस बार शारदीय अधिक मास के कारण नवरात्रि ,एक माह देरी से मनाई जायगी। उस बार नवरात्रि का पर्व 17, अक्टूबर से आरंभ होकर 25 अक्टूबर तक मानया जायगा।

नावरात्रि मनाने के पीछे का प्रकृति कारण यह माना जाता हैं कि इस समय ,मौसम परिवर्तन होता हैं इसलिए हम नो दिनों तक व्रत रखते हैं ,तो शरीर को परिवर्तित मौसम के अनुसार ढलने का समय मिल सकता हैं जो, हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।

जानते हैं नवरात्रि ,पर्व के पीछे का पौराणिक महत्व, नवरात्रि बनाने के विषय में “दो कथाएं “मिलती हैं-एक कथा ,रामनवमी से सबन्धित है तो दूसरी कथा ,महिषासुर के वध से सबन्धित है।


प्रथम कथा के अनुसार ,महिषासुर नाम का दानव था। वह ब्रह्मा जी का उपासक था।अपने तप के बल पर उसने ,ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि कोई उसकाअंत न कर सकें।

वह अपने बल पर निर्दयता से तीनों लोकों म आतंक मचने लगा। देवता और ऋषि मुनि सभी उसके कृत्यो से अत्यंत पेरशान हो गए। तब संसार के रचयिता , ब्रह्मा, पालनकर्त्ता विष्णु ओर देवो देव महादेव ने अपनी शक्तियों को एक साथ करके माँ दुर्गा को उयपन्न किया।

माँ दूर्गा, ओर महिषासुर ,के बीच पूरे नो दिन तक युद्ध चला। जिसके पश्चात, उस दानव का अंत कर दिया और उस दानव के आतंकी कृत्यों से मुक्ति दिलाई। दूसरी कथा के अनुसार ,सीता को लंका से वापस लाने के लिए जब श्री राम रावण से युद्ध करने जा रहे थे , तो उन्हें देवताओ ने माँ की आराधना करनेऔर उनसे विजकय का आशिर्वाद लेने की सलाह दी।

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