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अधिकारियों की लापरवाही से अभिलेखों में मृत घोषित हुआ वृद्ध, अब अपने जीवित होने का दे रहे हैं सबूत

लापरवाही कभी भी किसी भी सूरत में अच्छी नहीं हो सकती। खासकर जब बात किसी बच्चे या बूढ़े की हो तो बर्दाश्त करना हर किसी के बस से बाहर हो जाता हैं।

लापरवाही एक हद तक माफ की जा सकती है लेकिन अधिकारियों की लापरवाही अगर जीते जी किसी व्यक्ति को मृत घोषित कर दे तो ऐसे में उक्त विभाग और अधिकारी के साथ कैसा सलूक किया जाना चाहिए। इसके बारे में हमारी कानून व्यवस्था कोई पुख्ता कानून बना ही नहीं पाई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

यही कारण है कि आए दिन लापरवाही की तस्वीरें अखबारों की सुर्खियां बटोर रही होती है, परंतु इसके बावजूद भी किसी भी तरह का सुधार दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता है और आलम इसका खामियाजा आमजन को दर-दर की ठोकरें खाकर व नुकसान उठा कर पूरा करना पड़ता है।

ऐसा ही कुछ फरीदाबाद के एक 76 वर्षीय वृद्ध शिवदयाल गौतम के साथ हुआ। जिन्हें अधिकारियों की लापरवाही के चलते अभिलेखों में मृत कर दिया गया है, जिसके कारण उनकी वृद्धा पेंशन आनी बंद हो गई है। शिवदयाल गौतम का कहना है

कि उन का भरण पोषण सरकार द्वारा दी जाने वाली वृद्धा पेंशन पर ही निर्भर करता है। अधिकारियों द्वारा अभिलेखों में उन्हें मृत घोषित किए जाने से उनकी परेशानी कम होने का नाम ही नहीं ले रही है।

उन्होंने बताया कि मृत घोषित होने के कारण फरवरी माह से लेकर अभी तक उन्हें प्रदेश सरकार से दी जाने वाली पेंशन की एक पाई भी नहीं मिल पाई है।

ऐसे में वृद्ध अपनी पीड़ा को लेकर जिला समाज कल्याण अधिकारी के जिला उपायुक्त से लेकर एनआईटी विधायक नीरज शर्मा तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी समस्या का निवारण कोई भी कर पाने में असमर्थ साबित हो रहा है।

वहीं अधिकारियों की लापरवाही की बात करें तो उन्होंने काम करने में इतनी लगनता दिखाई की जीवित व्यक्ति को ही 26 अगस्त 2017 से मृत घोषित कर दिया है, और इसके कारण उनकी पेंशन फरवरी माह 2020 से आना बंद हो गई है।

इस बात का संज्ञान जब चंडीगढ़ मुख्यालय में लिया गया तो उन्होंने कहा कि कुछ समय लगेगा और सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि चंडीगढ़ से सारे डॉक्यूमेंट कब तक ठीक होकर आएंगे इसकी कोई समय सीमा निश्चित नहीं की गई।

वहीं इस बारे में फरीदाबाद की ही जिला समाज कल्याण अधिकारी यह स्वीकार करती है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी बुजुर्ग के साथ इस तरह की घटना घटित हुई हो। ऐसे सैकड़ों लोग हैं जिन्हें अभिलेखों में मृत बता दिया गया है। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को अपने जिंदा होने का सबूत देने में होती हैं।

उनका कहना है कि यह कर्म रुकेगा नहीं ऐसे ही चलता रहेगा और ऐसे ही लोग परेशान होते रहेंगे। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि कर्मचारी अभिलेखों में इस तरह की लापरवाही बरतने से बाज नहीं आएंगे।

क्योंकि उन्हें इस बात का अच्छे से ज्ञान है कि इस कृत्य से कोई कितना भी परेशान हो लेकिन उनके कानों में जूं तक नहीं रेनेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित बृष्क ने जो इतने समय तक भाग दौड़ में अपना समय व्यय किया है, उसकी भरपाई संबंधित कर्मचारी से अवश्य करवाई जानी चाहिए तभी कहीं जाकर इस घटना पर लगाम लग सकेगा।

इस खबर में इस्तेमाल की गई तस्वीरे केवल प्रतीकात्मक है

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