Pehchan Faridabad
Know Your City

वृंदावन के बांके बिहारी के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ देख प्रशासन के छूटे पसीने

देश भर में लगे लॉक-डाउन की वजह से सभी सेवाओं के बंद किये जाने के निर्णय में मंदिरों और गुरुद्वारों पर ताला लटकना भी शामिल था। पर अब जब 6 महीने से भी अधिक का समय बीत गया है और पूरे देश में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गयी है तो मंदिर भी खुलने लगे हैं और लोगों की भीड़ उमड़नी भी शुरू हो गयी है।

ऐसे में, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में भक्तों का आना तो लाज़मी था। इसके लिए प्रशासन ने सुबह श्रृंगार दर्शन से लेकर राजभोग आरती और शाम को उत्थापन दर्शन से लेकर शयन भोग आरती तक की झांकियों की दोनों पालियों के लिए दो-दो सौ भक्तों को ऑनलाइन पास के जरिए मंदिर में प्रवेश की इजाजत दी थी। पर मंदिर के कपाट खुलते ही प्रशासन के दावों के ढोल की पोल भी खुल गई।

प्रशासन ने भक्तों को दर्शन के लिए ऑनलाइन पास से ही एंट्री देने का सिस्टम बनाया पर इस सिस्टम की सूचना देना शायद भूल गयी। अधिकतर श्रद्धालुओं को पता ही नहीं था कि बिहारीजी के दर्शन के लिए ऑनलाइन पास का सिस्टम बनाया गया है। ऐसे में, बिहारी जी के कपाट तक पहुँच कर भी यदि पास नहीं तो बिहारी जी भी दूर हैं वाली स्थिति उत्त्पन्न हो गयी। जिससे काफी भक्तजन प्रशासन के इस रवैये से नाराज़ दिखे।

मंदिर में दर्शन के लिए प्रशासन ने सुबह श्रृंगार दर्शन से लेकर राजभोग आरती और शाम को उत्थापन दर्शन से लेकर शयन भोग आरती तक की झांकियों की दोनों पालियों के लिए दो-दो सौ भक्तों को ऑनलाइन पास के जरिए मंदिर में प्रवेश की इजाजत दी थी।

लेकिन प्रशासन की तैयारी ठीक न होने के कारण ही धक्का-मुक्की शुरू हो गयी और भीड़ देख प्रशासन के व्यवस्था इंतज़ाम पस्त होते चले गए। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि क्या ऑनलाइन सिस्टम सही विकल्प है? अगर हाँ, तो इसकी पूर्ण रूप से सूचना भक्तों तक क्यों नहीं पहुंचाई गयी?

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More