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नदी किनारे बहाए जाने वाले फूलों को मानव रचना कॉलेज की छात्राओं ने किया जीवित, बना दिया प्राकृतिक सिरप

कहा जाता है की हर वस्तु की अपनी अलग एक अहमियत होती है। परंतु उक्त वस्तु के बारे में गहनता से जांच कर और इस संभाल कर कुछ अलग ही कर दिखाना कलाकारी होती है। इसे हम उक्त व्यक्ति का हिडेन टैलेंट भी कह सकते हैं।

इसी छिपी हुई प्रतिभा का परिचय देते हुए मानव रचना शिक्षण संस्थान की न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स की छात्राओं ने ऐसा एक स्वास्थ्य वर्धक सिरप और फ्लावर बार तैयार किया है।

जिसे देख हर कोई अच्छा अचंभित हो गया और उनकी प्रतिभा की प्रशंसा करने से खुद को रोक नहीं पा रहा। अचंभित इसलिए क्योंकि यह वही फूल हैं जिन्हें पूजा करने के उपरांत किसी कचरे की भांति फेंक दिया जाता था।

वैसे तो हिंदू धर्म में फूलों का विशेष महत्व होता है। फूल हर हिंदू धर्म में भगवान के समक्ष प्रस्तुत कर पुजा अर्चना की जाती है। वहीं मुस्लिम संस्कृति में पीर-फकीरों की दरगाह पर फूलों की चादर बना कर चढ़ाई जाती है।

सिख, ईसाई व अन्य धर्मों में भी फूलों का महत्व है। शादी के फेरो से लेकर हर सुख-सुख में भी इनका इस्तेमाल होता है, तो विशेष उत्सव पर विशेष अतिथियों का स्वागत करने सहित कई शुभ कार्यों में किया जाता है।

वहीं फूलों की बदकिस्मती यह होती है कितने शुभ कामों में उपयोग होने के उपरांत इन्हें नदी नहरों में बहा दिया जाता है कई बार तो यही फूल नदी किनारे सड़ते गलते रहते हैं।

जिसके बाद मानव रचना शैक्षणिक संस्थान के न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स की छात्रा चेनिका, पूजा जिंदल, हरप्रीत कौर और मुस्कान ने फूलों का बिल्कुल सही इस्तेमाल किया है। छात्रा चेनिका ने बताया कि वह दिल्ली स्थित झंडेवालान मंदिर से एकत्र किए और उनसे स्वास्थ्यवर्धक सिरप और फ्लावर बार तैयार करने में जुट गई।

छात्रा ने आगे बताया कि हम सब ने मिलकर फूलों में समाहित पोषक तत्वों पर रिसर्च की और एक मंदिर में रोजाना चढ़ने वाले फूलों के बारे में जानकारी जुटाई और प्रोजेक्ट तैयार किया। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को डेवलपमेंट ऑफ वैल्यू एडेड प्रोडक्ट फ्रॉम टेंपल फ्लोरल वेस्ट नाम दिया। शुरुआती दौर में गुलाब और केलैन्डुला के फूलों को अपने प्रोजेक्ट को आधार बनाया।

छात्रों के अनुसार गुलाब के फूलों में रक्त को साफ करने, अस्थमा, उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने, ब्रोंकाइटिस, डायरिया, कफ, बुखार, हाजमे को दुरुस्त करने की क्षमता होती है, जबकि कैलेन्डुला के फूलों में भी महिलाओं को होने वाली बीमारियों से बचाव करने वाले पोषक तत्व समाहित होते हैं। यह प्रोजेक्ट प्राथमिक चरण में है और इसमें और कई बदलाव किए जाएंगे, ताकि उन्हें बाजार में उतारा जा सके।

प्राकृतिक तरीके से तैयार हुआ है छात्राओं का यह सिरप

छात्रा पूजा जिंदल के अनुसार बाजारों में मिलने वाले सिरप में सुगंध के लिए फूलों का सार (एब्सट्रैक्ट) मिलाया जाता है, लेकिन छात्राओं ने इन्हें पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से तैयार किया है और इसे तैयार करने में दो दिनों का समय लगता है।

इसमें केवल चीनी, गुड़ और नींबू के रस का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि गुड़ में आयरन की मात्रा सबसे अधिक होती है, जो महिलाओं के लिए सबसे अधिक लाभकारी है। इसमें केवल फूलों को अच्छी तरह धोया जाता है। इसके बाद फूलों को चुनकर गर्म पानी में तैयार किया जाता है। गुलाब और कैलेन्डुला के बाद अब वह गेंदे के फूलों के सिरप व बार तैयार करने के बारे में विचार कर रही हैं, क्योंकि पूजा में सबसे अधिक गेंदे के फूलों का इस्तेमाल होता है।

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