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जान की बाज़ी लगाने वाले सेनानी का परिवार लड़ रहा अपने सम्मान के लिए जंग, जानें कौन हैं ये स्वतंत्रता सेनानी

देश के लिए अपनी जान की बाज़ी लगाने वाले शहीदों को जितना नमन करें उतना कम है। देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वाले शहीदों को याद कर आज भी सर गौरव से ऊँचा हो जाता है पर मौजूदा समय में एक सैनानी का परिवार ऐसा है जो सम्मान के लिए इधर-उधर भटकने पर मजबूर है। नेता जी सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आजाद हिंद फ़ौज के सिपाही वीर सेनानी स्वर्गीय दलेल सिंह बिधुड़ी का परिवार इस समय सम्मान की गुहार लगाए बैठा है।

दरअसल, बादशाहपुर गांव में इनके नाम से प्रवेश द्वार बनना था जो कई महीनो अधूरा पड़ा है। पहले पूरा विश्व महामारी के दौर से गुज़रा तो उसके कारण भी काम पूरा न हो पाया पर अब जब देश भर में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गयी है और साथ ही, सभी ज़रूरी सेवाएं भी शुरू की जा चुकी हैं, तो परिवार की मांग है कि अब प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य शुरू किया जाना चाहिए। दलेल सिंह बिधुड़ी के बेटे श्यामबीर और पोते प्रवेश कुमार ने बताया कि दलेल सिंह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 5 साल जेल में बंद थे और 28 फरवरी 1994 देहांत हो गया।

दरअसल, बादशाहपुर गांव में इनके नाम से प्रवेश द्वार बनना था जो कई महीनो अधूरा पड़ा है। पहले पूरा विश्व महामारी के दौर से गुज़रा तो उसके कारण भी काम पूरा न हो पाया पर अब जब देश भर में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गयी है और साथ ही, सभी ज़रूरी सेवाएं भी शुरू की जा चुकी हैं, तो परिवार की मांग है कि अब प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य शुरू किया जाना चाहिए। दलेल सिंह बिधुड़ी के बेटे श्यामबीर और पोते प्रवेश कुमार ने बताया कि दलेल सिंह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 5 साल जेल में बंद थे और 28 फरवरी 1994 देहांत हो गया।

उन्ही के सम्मान में गांव प्रवेश द्वार बनाने का निर्णय लिया गया था जिसके लिए करीब 8 लाख रुपये का बजट भी पास हुआ था परंतु प्रवेश द्वार का सिर्फ स्ट्रक्चर पर इतने सालों से काम पूरा नहीं हुआ है। श्यामबीर ने बताया कि ठेकेदार की लापरवाही और ग्राम पंचायत से लेकर खंड विकास कार्यालय की अज्ञानता के कारण हो रहा है। कहीं भी गवाही न होने से परिवार ग्रसित और दुखी है।

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