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बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण ने आमजन की सांसो पर किया कब्जा, तो नेताओं के माथे पर खींची लंबी लकीर

पिछले कई दिनों से पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है। पर्यावरण को प्रदूषित करने के लिए कहीं ना कहीं आमजन ही अहम भूमिका अदा कर रही है। चिमनियों से निकलने वाला धुआं,

सड़कों पर उड़ने वाली धूल मिट्टी के कारण और वाहनों के माध्यम से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है ऐसे में प्रदूषण से वातावरण के हालात बिगड़ते हुए देख एनसीआर के थर्मल पावर प्लांट पर भी रोक लगा दी गई है।

दीपावली जिसे हिंदू धर्म में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, इस दिन लोग दिए जलाते हैं। भगवान राम के अयोध्या वापस आने की खुशी में जिस तरह अयोध्या नगरी में घी के दीप जलाए गए थे।

ऐसे ही अमावस्या के अंधकार को दूर करने के लिए पूरा देश द्वीप जलाता है। वही सरकार के मना करने के बावजूद भी पटाखे जलाए जाते हैं जिससे पर्यावरण का प्रदूषण स्तर और अधिक बढ़ जाता है।

ऐसे में अब बढ़ते हुए प्रदूषण को देख पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण ने थर्मल पावर प्लांट बंद करने की सहमति भी जताई।

इधर उक्त विषय पर सांसद एवं केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्ण पाल गुर्जर का कहना है कि प्रदूषण के कारण ताप विद्युत संयंत्रों को बंद करना उक्त समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि बिजली से उद्योग धंधे, कारोबार, किसानों की खेती इत्यादि जुड़ें हुए हैं। ऐसे में अगर विद्युत संयंत्रों को बंद कर दिया जाए, तो यह सभी काम भी कहीं ना कहीं प्रभावी हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि इन्हें बंद करने के बजाय यह देखना और सोचना होगा कि किस तरह प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह विद्युत संयंत्रों को बंद कर देने से उक्त सभी कार्य कहीं ना कहीं रुक जाएंगे। इसलिए हमें इस बात की जड़ तक जाना होगा कि किस तरह यह विद्युत संयंत्र पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं

, और इन पर किस तरह लगाम लगाई जा सके। साथ ही इन विद्युत संयंत्रों को चलाने का मापदंड क्या होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि उक्त मापदंडों को सख्ती से लागू करवाया जाए ताकि पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ने से रोका जा सके।

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