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जरा संभल के ,आपकी रफ्तार न बन जाये किसी मासूम की मौत का कारण

दर्द एक जगह हो तो बताएं कि दर्द कहां है। यहां तो अंग-अंग में दर्द ही दर्द है। जिले में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के कारणों की गहराई से पड़ताल करने पर इस मामले में यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। हादसों के पीछे कोई एक वजह नहीं बल्कि इसकी लंबी सूचि है जो सड़क दुर्घटनाओं को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।सड़क हादसे क्यों बढ़ रहे हैं, यह सभी को पता है। जन से लेकर तंत्र तक इस बात से वाकिफ है, लेकिन बात जब कर्तव्य निर्वहन की होती है, तो सभी पीछे हटते या फिर पल्ला झाड़ते नजर आते हैं।

सड़क पर वाहन चलाने में बरती जा रही लापरवाही का लोग शिकार हो रहे हैं। जिसमे लोग अपनी जान गवा रहे है। तजा मामलो में शहर
में अलग अलग हुए सड़क हादसों में दो लोग अपनी जान गवा चुके है। हाल ही में एक महिला ने सेक्टर 28 के रोड पर सड़क हादसे में अपनी जान गवाई ,और ऐसे कई लोग है जो सड़क हादसे में अपनी जान गवा चुके है। सड़क हादसे क्यों बढ़ रहे हैं, यह सभी को पता है। जन से लेकर तंत्र तक इस बात से वाकिफ है, लेकिन बात जब कर्तव्य निर्वहन की होती है, तो सभी पीछे हटते या फिर पल्ला झाड़ते नजर आते हैं।

चुकानी पड़ रही लापरवाही की कीमत

बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के पीछे बड़ी वजह चालकों की लापरवाही होती है। सबसे ज्यादा लापरवाही दोपहिया सवार बरतते देखे जाते हैं। उन्हें न तो यातायात नियमों के पालन की चिंता रहती है और न ही उनकी हरकत से दूसरों को होनेवाली परेशानी से। वे लापरवाही पूर्वक इस कदर रफ्तार में बाइक चलाते हैं जैसे हवा से बातें कर रहे हो। इस बीच थोड़ी से असावधानी होने पर दुर्घटना को अंजाम दे बैठते हैं। इससे अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं या फिर किसी राहगीर को मौत की नींद सुला देते हैं। ऐसी लापरवाही बरतने वालों में अधिकांश युवा वर्ग के चालक होते हैं। जिले में टीन-एजर्स बाइक चालकों की लापरवाही के कारण हर सप्ताह एक-दो सड़क दुर्घटना आम बात हो गयी है। लोग शराब के नशे में भी वाहन चलाने से गुरेज नहीं करते हैं। न केवल बाइक बल्कि सवारियों को लेकर जाने वाले तीन पहिया और चार पहिया वाहन के चालक भी नशे की हालत में गाड़ी चलाते हैं। ऐसे चालकों की वजह से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में मरने या घायल होने वाले लोगों की संख्या अधिक हो जाती है।

यातायात नियमों का पालन नहीं

सड़क सुरक्षा के लिए यातायात नियमों का पालन करना जरूरी है। ऐसा किए बिना हम सुरक्षित यात्रा नहीं कर सकते, लेकिन यहां इसका पालन नहीं हो रहा है। बात चाहे जिला मुख्यालय की हो या फिर ग्रामीण क्षेत्रों की, या चौबीस घंटे व्यस्त रहने वाले जीटी रोड की, कहीं भी लोगों को यातायात नियमों का पालन करते नहीं देखा जाता। सड़क पर जैसे-तैसे मनमानीपूर्वक वाहनों को खड़ा कर दिया जाता है। सड़कों पर ही लोग कई तरह के सामान भी रख देते हैं। इन कारणों से न केवल राहगीरों को परेशानी होती है, बल्कि सड़क हादसे भी होते हैं।

जर्जर सड़कें भी बन रही वजह

जिले की सड़कें भी ऐसे हादसों को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। कहीं सड़कों की जर्जरता तो कहीं गलत निर्माण व इसके उबड़-खाबड़ रहने से सड़क हादसे हो रहे हैं। इस कारण वहां वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त होता जा रहा है।फरीदाबाद में ऐसे कई जगा है जहा सड़के झज्जर पड़ी है ,जिसका शिकार होकर लोग अपनी जान गवाह देते है।

तीखे मोड़ के कारण भी होते हादसे

जिले के कई मुख्य मार्ग पर जगह-जगह तीखे मोड़ हैं, जहां एक ओर के वाहन चालकों को दूसरी ओर से आने वाली गाड़ियां दिखाई नहीं पड़ती। इससे वाहनों में टक्कर हो जाती है। बेंगाबाद में बारासोली मोड़ के पास इसी तरह के तीखे मोड़ के कारण हमेशा सड़क दुर्घटना होती है। ऐसे स्थानों पर बोर्ड लगाकर प्रशासन सड़क हादसों को कम कर सकता है।

ओवरलोड भी दुर्घटना की बड़ी वजह

लंबी दूरी की बसों से लेकर ऑटो सहित अन्य छोटे-छोटे वाहनों में क्षमता से अधिक सवारी बैठाए जाते हैं। अधिक लोड रहने के कारण वाहनों का अनियंत्रित होकर दुर्घटना का शिकार होना यहां के लिए कोई नई बात नहीं है। इसके अलावा वाहनों के फिटनेस आदि की भी जांच नियमित नहीं होती है। ट्रैक्टर और ट्राली वाहन तो दुर्घटना के पर्याय ही बन गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे वाहनों को चलाने वाले अधिकांश नाबालिग और बिना लाइसेंस वाले होते हैं। शहर में भी कई नाबालिगों को ऑटो-ट्रैक्टर आदि चलाते देखे जाते हैं।

टीनएजर्स के कारण बढ़ते सड़क हादसे
आए दिन सड़क दुर्घटना होते रहने के बावजूद लोग ऐसे हादसों से सबक नहीं ले रहे हैं।टीनएजर्स को माँ बाप बिना सोचे समझे वाहन पकड़ा देते है और सड़क पर चलने के लिए भेज देते है। और भूल जाते है की उन्हें सड़क के नियमो के बारे में पता भी है की नहीं। ना समज और सड़क नियमो की सही जानकारी न होने के कारण टीनएजर्स सावधानी नहीं बरतते, न तो यातायात नियमों का पालन करते हैं और न ही बाइक चालक हेलमेट आदि का उपयोग करते हैं।और यह भी एक मुख्य कारण बन जाता है सड़क हादसों का।

महकमा भी नहीं गंभीर

बढ़ते सड़क हादसों पर रोक लगाने की दिशा में संबंधित महकमा भी गंभीर नजर नहीं आता। वाहन चालकों की मनमानी पर रोक लगाने, ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई करने, जर्जर व बेतरतीब ढंग से बनी सड़कों को दुरुस्त करने की जरूरत है। इसके बिना ऐसे हादसों को कम नहीं किया जा सकता है, लेकिन संबंधित विभागों की पहल इस दिशा में न के बराबर देखी जाती है।

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