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कर्तव्य को रखा ख़ुद से ऊपर: वो महिलायें, जो डिलीवरी के फ़ौरन बाद काम पर लौट आईं

मां बनना हर महिला की जिंदगी का बेहद हिस्सा होता है। जिसमें वह अपनी खुशी बयां नहीं कर पाती, ठीक उसी तरह अपना दर्द बयां नहीं कर पाती। वेदों पुराणों में भी कहा गया है कि महिलाओं से ज्यादा शक्तिशाली कोई नहीं होता क्योंकि महिला जितनी दर्द झेल सकती है उतना कोई नहीं।

एक महिला को मां बनने की जितनी खुशी होती है उतनी दर्द व पीड़ा में होती है। आप सभी को पता होगा कि जब महिला की डिलीवरी होती है तो कितना दर्द झेलना पड़ता है।

पहले तो 9 महीने बच्चे को पेट में पालना उसके बाद डिलीवरी के समय अलग दर्द सहना पड़ता है। मानते है कि डिलीवरी के समय महिला मौत के मुंह से बाहर आती है। डिलीवरी के काफी दिन के बाद भी महिला अच्छे से चल फिर नहीं सकती है। क्योंकि उनका ये जख्म जीवन भर रहता है। इसके बावजूद कई महिलाएं ऐसी है जिन्होंने अपने शक्तिशाली को पेश किया है।

जी हां कई ऐसी महिला जो डिलीवरी के तुरंत बाद काम पर लौट आयी है। जिन्होंने खुद से ऊपर अपने काम व फर्ज को रखा है। जी हां ऐसी महिला जो बच्चे को जन्म दे के कुछ दिनों बाद ही अपने कर्म भूमि पर पहुंच गई है। सौम्या पांडेय ज्वांइट मजिस्ट्रेट गाजियाबद का सीडीओ कानपुर देहात बनाया गया है।

सौम्या पांडेय नन्ही सी बेटी के साथ ड्यूटी पर लौटी थीं। बेटी के साथ ड्यूटी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। उनके इस क़दम से उनकी देशभर में तारीफ़ हुई।

17 सितंबर को डिलेवरी के मात्र 14 दिन बाद एक अक्तूबर को फिर से कार्यभार ग्रहण कर लिया। प्रयागराज की रहने वालीं सौम्या पांडेय की गाजियाबाद में मोदीनगर एसडीएम के पद पर यह पहली नियुक्ति थी। सौम्या पांडेय ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें लगातार अधिकारियों और कर्मचारियों का सहयोग मिलता रहा।

उन्होंने कहा कि कर्तव्यों के साथ-साथ एक मां के दायित्वों का निर्वाहन करना भी उनका फर्ज है। कर्नाटक के शिवमोग्गा के एक अस्पताल में कर्तव्यनिष्ठ एक नर्स की तस्वीर सामने आई।

9 महीने की गर्भवती रूपा राव प्रवीण अपने इलाके के जय चामाराजेंद्र सरकारी अस्पताल में एक नर्स के रूप में अपनी सेवाएं दी है। गजनुरू गांव की रहने वाली रूपा गर्भवती होने के बावजूद आराम करने की बजाय कोविड-19 के मरीजों की सेवाएं दी।

उनकी ये नेक काम को देख कर्नाटक सीएम येदियुरप्पा ने रूपा को बुला कर उनकी प्रशंसा की थी। झांसी में महिला पुलिस कॉन्स्टेबल अर्चना जयंत हर दिन की तरह सामान्य रूप से अपनी ड्यूटी पर थीं।

मगर जैसे ही उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर आई, उनके प्रशंसकों की बाढ़ सी आ गई। क्योंकि जिस रूप में वह थाने में अपनी ड्यूटी निभाती दिखीं, वह कोई सामान्य बात नहीं।

ट्विटर पर एक तस्वीर आई, जिसमें अर्चना अपनी बच्ची के साथ दिखीं। थाने में वह एक ही वक्त में अपनी बच्ची की देखभाल भी कर रही हैं और अपनी ड्यूटी भी ईमानदारी से निभा रही हैं।

जब कोरोना अपने पैर पसार रहा था तब ग्रेटर विशाखापटनम के नगर निगम की कमिश्नर जी सृजन ने अपने बच्चे को जन्म दिया।

मां बनने के बाद उन्होंने लंबी छुट्टी नहीं ली बल्कि डिलीवरी के मात्र 3 सप्ताह बाद वह अपने काम पर लौट आईं। सृजन ने ये भी कहा था कि इसके लिए उन पर दबाव नहीं डाला गया बल्कि वह खुद काम पर लौटी हैं। ये समय एक साथ खड़े होने और अपनी मजबूती दिखाने का है।

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