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हवा थमते ही बढ़ा प्रदूषण स्थर, फरीदाबाद में फेल रही है जहरीली हवा

जीवन जीने के लिए कम से कम सांसें तो जरूरी हैं ही।और ये सांसें सुचारु रूप से आती रहें इसके लिए जरूरी है साफ हवा। लेकिन जब प्राण वायु ही जहरीली हो जाए और मौत देने पर उतारू हो जाए, तो कोई भला क्या करे। दुनिया भर की तमाम रिपोर्टों और शोधों के मुताबिक भारत दुर्भाग्य से उन देशों की सूची में सबसे ऊंचे पायदान पर है, जहां हवा जीने लायक नही है।

बारिश व तेज हवाओं के कारण फरीदाबाद में प्रदूषण का स्तर काफी कम हो गया था।हवा की गति थम जाने से प्रदूषण एक बार फिर से बढ़ने लगा है। बुधवार को पीएम 2.5 की मात्रा 302 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज की गई।मंगलवार को पीएम 2.5 स्तर 231 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से नीचे दर्ज किया गया। सोमवार को पीएम 2.5 की मात्रा 194 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज हुई वही रविवार को पीएम 2. 5 स्तर 189 माइक्रोग्राम मीटर दर्ज की गयी। वही आज पीएम दर बाकि दिनों से अधिक रहा बता दे की गुरुवार को पीएम 2.5 की मात्रा 321 तक रही।

सिस्टम आफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फार कास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक सतह पर चलने वाली हवाओं की चाल थमने से प्रदूषण फिर से बढ़ा है।केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा प्रतिदिन शाम को फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता की स्थिति पर रिपोर्ट जारी की जाती है।

सीपीसीबी द्वारा तय मानकों के अनुसार वायु गुणवत्ता एक्यूआइ 0-50 तक रहने पर अच्छी, 51-100 तक संतोषजनक, 101-200 तक मध्यम और 201-300 तक खराब रहती है। वायु गुणवत्ता खराब स्थिति में रहने से सांस, दमा और फेफड़े के रोगों से पीड़ित लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। और स्थिति अब ख़राब हो चुकी है और इसका परिणाम तो सब भुगत ही रहे है। लेकिन सवाल यह उठता है की क्या स्तिथि हमेशा ऐसी ही रहेगी या फिर सर्कार और जनता आने वाले इस खतरनाक स्तिथि के लिए सक्रिय होंगे और इसे सुधरने का प्रयास करेंगे ?

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