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बढ़ता प्रदूषण बढ़ा रहा है अस्थमा एवं हृदय रोगियों की परेशानी, जानें प्रदूषण से बचने के उपाय

दशहरा, दीपावली, दुर्गा पूजा और भी त्योहारों की झड़ी लगने को है। दीपावली जल्द ही आने वाली है और चारों ओर त्योहारों की धूम है पर प्रदूषण एक गंभीर परेशानी के रूप में उबर कर आ रहा है। प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदूषण की वजह से अस्पतालों में हृदय एवं सांस संबंधी रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।

अभी तो महामारी का संकट ही नहीं टला है और अब प्रदूषण की बढ़ती परेशानी लोगों की नाक में दम की हुई है। प्रत्येक वर्ष दीपावली के बाद प्रदूषण का स्तर भयंकर रूप से बढ़ जाता है, इस बात में कोई दो राहें नहीं हैं। पर अभी तो दीपावली आयी भी नहीं है और अभी से ही प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप ले चुका है। प्रत्येक वर्ष दीपावली के बाद से धुंए की चादर जिले में कई दिनों तक छायी रहती है। इससे सांस, हृदय, रक्तचाप, आँखों में जलन के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होती है।

धुंद में लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। यह परेशानी लेटर स्टेज पर अस्थमा का रूप ले लेती है। इसमें सांस लेने में परेशानी के अलावा खांसी, बलगम, एलेर्जी की समस्या होती है। इसके अलावा स्वच्छ वातावरण नहीं होने पर हृदय को अधिक कार्य करना पड़ता है। इससे हृदयघात होने की आशंका रहती है। वहीँ धुंध से उच्च रक्तचाप के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है।

प्रदूषण से बचने के उपाय :
१. अस्थमा के मरीज इनहेलर समय पर लें और मास्क लगाकर ही बहार निकलें।

२. हृदय एवं अस्थमा के मरीज सुबह और शाम की सैर से परहेज करें।

३. घर पर रोज सुबह व्यायाम और योग करने से लाभ होगा।

४. कम से कम तनाव लें और पौष्टिक आहार लें।

५. अस्थमा के मरीजों के लिए भाप लेना भी बहुत हितकारी है। इससे फेफड़ों को आराम मिलता है।

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