Pehchan Faridabad
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शहर की हवा हुई बद से बत्तर,406 पॉइंट तक पहुंचा प्रदूषण स्थर

शहर की आबोहवा लगातार जहरीली हो रही है, धीरे धीरे पूरा शहर गैस चैम्बर में तब्दील होता जा रहा है। देश-दुनिया में प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसे रोकना बहुत जरूरी है। यदि इसे नहीं रोका गया, तो पूरा जीवन ही समाप्त हो जाएगा। प्रदूषण रोकने के लिए हर साल नियम-कानून बनते हैं। फिर भी यह कम नहीं हो रहा है। इसके मुख्य कारण हैं- स्वयं जनता और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी।

हम किसी देश के बारे में कहते हैं कि वह कितना सुंदर व प्रदूषणमुक्त है। लेकिन हम यह जानने का प्रयास नहीं करते कि यह कैसे मुमकिन हो सका? इसका सबसे मुख्य कारण यह है कि वहां के कर्मचारी व आम लोग अपना काम बड़ी जिम्मेदारी से करते हैं, जबकि अपने यहां ऐसा नहीं है। जैसे, यदि यहां कूड़ेदान हैं, तो लोग दूर से ही उनमें कचरे फेंकते हैं, जो कूड़ेदान में न जाकर इधर-उधर गिर जाते हैं। इसलिए हमें खुद को स्वच्छ देश बनाना होगा।

त्यौहार का सीजन शुरू हो चूका है ,नवरात्र के बाद सबसे पहले विजयदशमी का त्यौहार बनाया जाता है ,और फिर शुरू होती है त्योहारों की लड़ियाँ और साथ ही शुरू होता है प्रदुषण का खतरा। दिवाली से पहले और दिवाली के बाद प्रदुषण का का स्तर अपने चर्म पर होता है। हाल ही में शुक्रवार को पीएम 2.5 की मात्रा 257 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 की मात्रा 457 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज की गई।शनिवार को पीएम 2.5 स्तर 236 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 की मात्रा 380 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया । रविवार को 12 :30 तक पीएम 2.5 की मात्रा 181 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 की मात्रा 337 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज हुई । शुक्रवार को पीएम का डर सबसे अधिक मात्रा दर्ज किया गया।

सिस्टम आफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फार कास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक सतह पर चलने वाली हवाओं की चाल थमने से प्रदूषण फिर से बढ़ा है।केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा प्रतिदिन शाम को फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता की स्थिति पर रिपोर्ट जारी की जाती है।सीपीसीबी द्वारा तय मानकों के अनुसार वायु गुणवत्ता एक्यूआइ 0-50 तक रहने पर अच्छी, 51-100 तक संतोषजनक, 101-200 तक मध्यम और 201-300 तक खराब रहती है। वायु गुणवत्ता खराब स्थिति में रहने से सांस, दमा और फेफड़े के रोगों से पीड़ित लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। और स्थिति अब ख़राब हो चुकी है और इसका परिणाम तो सब भुगत ही रहे है। लेकिन सवाल यह उठता है की क्या स्तिथि हमेशा ऐसी ही रहेगी या फिर सर्कार और जनता आने वाले इस खतरनाक स्तिथि के लिए सक्रिय होंगे और इसे सुधरने का प्रयास करेंगे ?

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