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मोबाइल तो दूर की बात, पहनने को चप्‍पल तक नहीं, फिर भी लड़ रहे हैं चुनाव

आज तक आपने ऐसे प्रत्याशी देखे होंगे जिनका एक अलग रूतबा होता है। हमारे देश में चुनाव धन-बल-साधन प्रदर्शन का एक जरिया जैसा बन गया है। कई सीटों पर तो लड़ाई ही मुद्दों पर न होकर पैसे और बाहुबल की हो जाती है। जब कोई प्रत्याशी नामांकन भरने के लिए आता है तो बड़ी बड़ी गाड़ियों के लाइन लग जाती है।

कुछ प्रत्याशी ऐसे हैं जो जेब से फकीर हैं और उनकी सादगी की कोई तुलना नहीं है। जीं हां ऐसे एक प्रत्याशी है बिहार के लखीसराय सीट पर चुनाव की तैयारी करने वाले भरत महतो। भरत महतो निर्दलीय प्रत्‍याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे हैं।

इनके पास न तो खुद का मोबाइल फोन है और न ही इनके पैरों में चप्पल दिखती है। इनकी सादगी के किस्से ही अलग है। आम से कपड़े पहने, ना पैरों में चप्पल ना जेब में मोबाइल फिर भी चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। इनकी सादगी का आलम तो ये है कि इनके नामांकन के शपथपत्र में भी साढू का नंबर दिया गया है।

महतो के घर में एक छोटा मोबाइल है, जिससे बाहर काम करने गए बेटे उनका हाल-चाल लेते रहते हैं। महतो ने नामांकन के समय भरे जाने वाले शपथपत्र में अपने साढ़ू का फोन नंबर दे रखा है। ऐसा पहली बार नहीं है कि भरत महतो चुनावी मैदान में उतरे हैं। इसे पहले भी वो दर्जनों बार चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन वो सभी चुनाव उन्‍होंने पंचायत स्‍तर के लड़े हैं।

महतो का कहना है कि अब तक मैं कितनी बार चुनाव लड़ चुका हूं, यह मुझे खुद भी याद नहीं है। भरत महतो प्रधान से लेकर वार्ड, जिला परिषद, पंचायत समिति, पैक्‍स अध्‍यक्ष जैसे हर चुनाव में किस्‍मत आजमा चुके हैं लेकिन हर बार हार ही मिली। उनका कहना है कि हमारे पास पैसा कहां है जो हम चुनाव जीतेंगे। चुनाव वो जीतता है जिसके पास पैसा होता है।

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