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मेवात में छात्रों को जबरन ग्रहण करवाई जाती है इस्लामिक शिक्षा, तैयार किए जाते हैं कट्टर इस्लाम

फरीदाबाद में बल्लभगढ़ के अंतर्गत आने वाले अग्रवाल कॉलेज के सम्मुख गोली मारकर हुई निकिता नामक छात्रा की हत्या के बाद से ही लव जिहाद को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। दरअसल, छात्रा को गोली मारने वाला व्यक्ति तौसीफ खान एकतरफा प्यार में पड़कर छात्रा का धर्म परिवर्तन करवाना चाहता था परंतु छात्रा ने इससे इनकार किया तो उसने इस बात का बदला छात्रा की हत्या कर लिया।

दरअसल जिस दिन लगे हाथ को लेकर बखेड़ा खड़ा हो गया है उसके पीछे का जिम्मेदार मेवात मॉडल हैं। इसका कारण यह है कि बल्लभगढ़ में निकिता की हत्या करने के बाद आरोपी तौसीफ और रेहान हरियाणा के मेवात भाग गए थे।

इसलिए आपको लव जेहाद के पीछे जिम्मेदार मेवात मॉडल को भी समझ लेना चाहिए। ये मेवात मॉडल मेवात और हरियाणा के आस पास के इलाकों से हिंदुओं के पलायन के लिए भी जिम्मेदार है और आपने निकिता के परिवार को सुना वो भी कह रहे थे कि वो फरीदाबाद से पलायन करना चाहते थे।

मेवात में नहीं चलते हैं संसद द्वारा बनाए गए कानून और संविधान।

देश की संसद से मेवात की दूरी 100 किलोमीटर से भी कम है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जहां हरियाणा के गुड़गांव जैसे शहरों की सीमा खत्म होती है, वहीं से मेवात जैसे इलाकों की सीमा शुरू होती है

और इन इलाकों में अक्सर देश की संसद द्वारा बनाए गए कानून और संविधान नहीं चलते। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं इसे समझने के लिए आपको मेवात के इतिहास और भूगोल को समझना होगा। फिर आपको सारी बात समझ में आ जाएगी।

औद्योगिक नगरी से होते हुए मेवात तक पहुंचते-पहुंचते बन जाती है अपराधिक नगरी

साइबर सिटी के नाम से मशहूर गुरुग्राम से मेवात की दूरी सिर्फ 60 किलोमीटर है। गुरुग्राम में आधुनिकता और विकास की जो चमक दमक आपको दिखाई देती है वो मेवात पहुंचते पहुंचते अपराध और कट्टरपंथ के अंधेरे में बदल जाती है।

अगर आप दिल्ली से राजस्थान के अलवर तक का सफर करेंगे तो आपको मेवात से होकर गुजरना होगा। मेवात में मुख्य रूप से जो विधासभा सीटें आती हैं वो हैं नूंह, फिरोजपुर, झिरका और पुन्हाना।

मेवात के कई हिस्सों में पुलिस पर जाने से है कतराती

मेवात के इन्हीं इलाकों में अपराधियों के जो गैंग्स सक्रिय हैं, उन्हें मेवाती गैंग कहा जाता है और ये गैंग्स दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों की पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए है।. मेवात आतंकवादियों को शरण देने से लेकर लूटपाट, डकैती, अपरहरण और हत्या जैसे अपराधों के लिए भी बदनाम है। मेवात में इस समय अपराधियों के करीब 100 से ज्यादा गैंग्स सक्रिय हैं

और मेवात में कई इलाके ऐसे हैं जहां पुलिस भी जाने से डरती है. मेवात की आबादी की बात की जाए तो यहां 80 प्रतिशत मुसलमान रहते हैं जबकि 20 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की है। मेवात के अपराधियों के ये गैंग्स कभी जानवरों की तस्करी के लिए कुख्यात हुआ करते थे. लेकिन अब ये इलाका गाड़ियों की चोरी, हथियारों की तस्करी और बलात्कारियों को शरण देने के लिए बदनाम हो चुका है।

NITI आयोग की रिपोर्ट मैं हुआ खुलासा भारत के पिछले जिलों में से एक मेवात

NITI आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक मेवात भारत के सबसे पिछड़े जिलों में से एक है. वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक मेवात की जनसंख्या 10 लाख है, जिनमें से सिर्फ 56 प्रतिशत लोग ही पढ़ना-लिखना जानते हैं. साक्षरता दर के मामले में पूरे हरियाणा में मेवात की स्थिति सबसे बुरी है।


वर्ष 2016 तक गुड़गांव की जेल में 2 हज़ार 100 अपराधी बंद थे और इनमें से 500 अपराधी सिर्फ मेवात के रहने वाले थे। यानी गुड़गांव की जेल में बंद कुल कैदियों में मेवात के अपराधियों की संख्या 24 प्रतिशत थी। वर्ष 2016 तक फरीदाबाद की ज़िला जेल में भी जितने कैदी बंद थे. उसमें से भी 25 प्रतिशत मेवात के थे।

बड़ी संख्या में यहां हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें मुसलमान बनाया गया

तबलीगी जमात की विचारधारा का जन्म स्थान
80 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले मेवात की सीमाएं राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी मिलती है. मेवात को ही तबलीगी जमात की विचारधारा का जन्म स्थान माना जाता है।8वीं, 11वीं और 12वीं शताब्दी में इस पूरे इलाके पर इस्लाम का जबरदस्त प्रभाव पड़ा

और इसी दौरान बड़ी संख्या में यहां हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें मुसलमान बनाया गया. मेवात में जो राजपूत मुसलमान बन गए थे उन्हें ‘मेव’ भी कहा जाता है। मेवात इलाके में धर्म परिवर्तन का जो सिलसिला 8वीं शताब्दी में शुरू हुआ था और लंबे समय तक जारी रहा और इसका नतीजा ये हुआ मेवात भारत के उन जिलों में शामिल हो गया जहां की बहुसंख्यक आबादी मुसलमान है।

वर्ष 2013 में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि हरियाणा के 500 गावों में से 103 गांव ऐसे हैं जहां अब एक भी हिंदू नहीं बचा है, जबकि 82 गांव ऐसे हैं जहां सिर्फ चार से पांच हिंदू परिवार बचे हैं.
ये रिपोर्ट 7 वर्ष पुरानी है इसलिए हम ये तो नहीं कह सकते कि आज मेवात में क्या स्थिति है. लेकिन मेवात में हालात बेहतर हुए हों इसकी संभावना भी बहुत कम है।

वोटबैंक को खोने का डर नेताओं के आड़े बनता है मेवात मॉडल का विरोध

कुछ लोग मेवात को कट्टर इस्लाम की प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं और ये बात कई बार साबित भी हो चुकी है। मेवात के कुछ स्कूलों में हिंदू छात्रों को इस्लाम की शिक्षा दी जा रही थी और उन्हें नमाज पढ़ने पर मजबूर किया जा रहा था।

ये वो मेवात मॉडल है जिसकी आड़ में पूरे देश में कट्टर इस्लाम को बढ़ावा देने की कोशिश हो रही है। यही मेवात मॉडल बच्चों को जबरदस्ती धार्मिक शिक्षा देने से लेकर अब लव जेहाद और लैंड जेहाद में बदल चुका है।

मेवात में ये सब कई दशकों से हो रहा है., लेकिन राजनेता सिर्फ इसलिए ये सब चुपचाप देखते रहते हैं क्योंकि वो मेवात की बहुसंख्यक आबादी को नाराज नहीं करना चाहते और इस वोटबैंक को खोने का डर उन्हें मेवात मॉडल का विरोध करने से रोक देता है।

मेवात की आबादी

वर्ष 1981 में मेवात की आबादी में मुसलमानों की आबादी 66 प्रतिशत थी जो वर्ष 2011 आते-आते लगभग 80 प्रतिशत हो गई। वर्ष 1947 में जब भारत का बंटवारा हुआ तो पूरे देश में हिंदू और मुसलमानों के बीच दंगे शुरू हो गए और इन दंगों से मेवात भी बच नहीं

पाया। लोगों को शांत करने के लिए तब खुद महात्मा गांधी मेवात के कुछ गांवों में पहुंचे और उन्होंने मेवात के मुसलमानों से अपील की है कि वो देश छोड़कर पाकिस्तान न जाएं। गांधी जी ने मेवात के मुसलमानों को समझाते हुए कहा कि आप इस देश की रीढ़ की हड्डी हैं.

अब ये भी अजीब विडंबना है कि कथित लव जेहाद के नाम पर जिस निकिता तोमर की हरियाणा के बल्लभगढ़ में हत्या की गई है और उसका जन्म दिन 30 जनवरी को आता है। 30 जनवरी वही तारीख है जिस दिन वर्ष 1948 में नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर गांधी जी की हत्या कर दी थी।

गांधी जी मेवात के मुसलमानों को देश की रीढ़ की हड्डी मानते थे और ये ठीक है कि कुछ कट्टरपंथियों और अपराधियों की वजह से पूरे मेवात के लोगों को दोष देना ठीक नहीं है, लेकिन आज मेवात के लोगों को भी ये सोचना चाहिए कि जिस नफरत और कट्टरपंथ की दीवारों से उनके जीवन को घेर लिया गया है वो दीवारें इसलिए खड़ी हो पाईं है क्योंकि इस देश का मुसलमान 70 वर्षों से तुष्टिकरण की कोशिशों को स्वीकार करता आया है और इसी तुष्टिकरण ने न सिर्फ मेवात को कट्टर इस्लाम के केंद्र रूप में पहचान दिलाई है, बल्कि यहां रहने वाले मुसलमानों को भी कभी आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया।

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