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प्याज के रेट बढ़ने से पहले हरियाणा सरकार खंगालेगी गोदाम, प्याज के फुटकर व थोक दामों पर होगी नजर

इस वर्ष कर्नाटक और प्याज उत्पादक महाराष्ट्र के हिस्सों में अलविदा मानसून की भारी बरसात के चलते प्याज की फसल को बड़ी मात्रा में नुकसान पहुंचा है। यही कारण है कि अब उत्तर भारत में प्याज की आवक अपेक्षाकृत कम हो गई है और आने वाले समय में इसकी मांग को देखते हुए इसके दाम भी बढ़ाए जाएंगे।

वैसे बताते चले कि हरियाणा में प्याज का फोटो कर रेट वर्तमान समय में 65 से लेकर 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुका है। वहीं चंडीगढ़ और दिल्ली की बात करें तो अभी हरियाणा में रेट इन जगहों की तुलना में कम ही है।

गौरतलब, विगत रविवार से त्योहारों की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में बढ़ते हुए प्याज के दामों को देखते हुए सरकार पहले ही भाग चुकी है कि आने वाले समय में
सूबे में कारोबारी प्याज की जमाखोरी भी कर सकते हैं।

लिहाजा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सभी जिलों के खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों को अपने-अपने इलाकों में प्याज के फुटकर व थोक दामों के साथ-साथ उसकी जमाखोरी पर भी पैनी नजर और गोदाम खंगालने के निर्देश दिए हैं। इसका कारण यह है कि सरकार नहीं चाहती है कि प्याज के ज़्यादा कीमत आमजन से वसूली जाए।

इस विषय पर विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी.के दास ने बताया कि सभी जिलों में खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक बाजार में प्याज की स्थिति पर नजर रखेंगे। उन्होंने बताया कि दिल्ली और चंडीगढ़ के अपेक्षाकृत हरियाणा में प्याज के दाम अभी भी कम है।

उन्होंने बताया कि हरियाणा में अभी भी प्याज की कीमत 65-80 है जबकि उक्त दोनों शहरों में में प्याज के रेट 70 से 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह सब देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि कारोबारियों द्वारा प्याज की जमाखोरी की आशंका बनी रहती है।

अभी राजस्थान द्वारा हरियाणा में प्याज की आपूर्ति की जा रही है। वहीं उत्तरी कर्नाटक व महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक जिलों अहमदनगर, नासिक और पुणे में अत्यधिक बारिश की वजह से जहां प्याज की खेती खराब हुई है, जिसके चलते मध्यप्रदेश,

गुजरात में स्टोर किए गए प्याज के वितरण प्रभावित हुआ है। बागवानी विशेषज्ञ मानते हैं अत्यधिक यूरिया की वजह से इस बार प्याज की सेल्फ लाइफ पिछले साल के अपेक्षाकृत कम देखी जा रही है।

जिस वजह से भंडारण में रखा प्याज भी सड़ा है। इसी के चलते हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को प्याज के दाम बढ़ने और उसकी जमाखोरी की आशंका सता रही है।

दास ने आगे यह भी बताया कि अभी फिलहाल बाहरी प्याज मंगवाने की आवश्यकता ही नहीं है। उन्होंने बताया कि बाहरी देशों से मंगवाए गए प्याज का हरियाणा वासियों को प्याज का स्वाद जचता नहीं है। उन्होने कहा कि पिछले वर्ष ऐसा देखने में आया था कि जब अफगानिस्तान का प्याज हरियाणा की मंडियों में बिका था। एक बार चखने के बाद हरियाणवियों ने सस्ता होने के बावजूद इसे खरीदना तो दूर देखना भी नामंजूर कर दिया था।

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