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Haryana Day Special: जानें कैसे फरीदाबाद ने हरियाणा को दिलाई अंतर्राष्ट्रीय पहचान, दुनिया में किया हरियाणा का नाम रोशन

फरीदाबाद हरियाणा की उद्योगिक नगरी मानी जाती है। 1 नवंबर 1966 को हरियाणा ने पंजाब से अलग हो कर 17वें राज्य का दर्जा हासिल किया था और इसी के साथ, 1949 में बसे उद्योगिक नगरी एन.आई.टी ने विकास की राह पर कदम बढ़ा लिया। फरीदाबाद ने हरियाणा का नाम न सिर्फ हिन्दुस्तान में बल्कि पूरे विश्व में ऊँचा किया है।

फरीदाबाद ने विकास और प्रगति की वो उदास भरी जिससे हरियाणा को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली है। बता दें कि, 15 अगस्त 1979 को गुरुग्राम से अलग हो कर फरीदाबाद को 12वें जिले का स्थान प्राप्त हुआ था। वर्ष 1994 में प्रदेश के पहले नगर निगम का गठन भी फरीदाबाद में ही हुआ था। उद्योगिक नगरी में विश्व की सबसे सस्ती कार से लेकर जैगुआर, मर्सेडीज़, BMW कारों के पुर्जे भी बनते हैं।

जवानों के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट बनाती ओद्योगिक नगरी फरीदाबाद

जिले में उद्योगों में मंगलयान के पुर्जे से लेकर सीमा डटे देश के जवानों की सुरक्षा करने वाली बुलेट प्रूफ जैकेट भी बनाती ओद्योगिक नगरी फरीदाबाद। वर्तमान में प्रदेश के कुल राजस्व का 56 फ़ीसदी हिस्सा उद्योगिक नगरी प्रदान करती है। उद्योगों के साथ सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय मेले ने भी जिले को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है।

सूरजकुंड मिले ने दिलाई अंतर्राष्ट्रीय पहचान

वर्ष 1987-88 में सूरजकुंड में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला लगाया गया। वर्ष 1989 में आयोजित इस मेले में राजस्थान थीम स्टेट का कांसेप्ट शुरू किया था। आज के समय में, सूरजकुंड मेले में देश विदेश के लाखों लोग हिस्सा लेते हैं।

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