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मारपीट और पत्थरबाज़ी की बलि चढ़ा निकिता का इंसाफ : मैं हूँ फरीदाबाद

नमस्कार! मैं फरीदाबाद आज आप सभी से कुछ सवाल पूछने आया हूँ। मैं जानता हूँ कि निकिता की मौत से आप सभी दुखी हैं और आपके मन में उन्माद मचा हुआ है। पर इसका यह मतलब नहीं कि आप प्रदर्शन की आड़ में प्रलय मचाने लगें। मैं इस बात से पूर्णतः अवगत हूँ कि निकिता के लिए इंसाफ की गुहार लगाना हम सभी का परम् कर्तव्य है।

पर प्रदर्शन करते करते मर्यादा को लांगना अपराध है। कल मेरे प्रांगण में जो हुआ उसे देख मेरा कलेजा तार तार हो गया। जानते हैं क्यों ? क्योंकि जिस बेटी के लिए इंसाफ की मांग की जा रही थी सब उसे भूलकर अब राजनीति की रोटियां सेकी जा रहीं हैं। कल मेरे प्रांगण में निकिता के इंसाफ की आड़ में जो अपराध हुआ है उसने मुझे शर्मसार कर दिया है।

लाठी, पत्थर और जूतों के बीच धर्म के नाम पर मची ज़ुबानी जंग ने पूरे शहर की आबरू को निस्तेनापूत कर दिया। बल्लभगढ़ में निकिता की हत्या पर इंसाफ की मांग करते हुए एक महा पंचायत का आयोजन किया गया।

पर 36 बिरादरियों द्वारा आयोजित की गई महापंचायत हंगामे की भेंट चढ़ गई। महापंचायत की आड़ में कल क्षेत्र में कलेश मचाया गया। कोई गाड़ी के ऊपर चढ़ गया तो कोई बैरिकेट को ज़ोर ज़ोर से पीटने लगा। पत्थर फेंके गए और तोड़ फोड़ मचाई गई और एक बेक़सूर के कमाई को उनसे छीन लिया गया। क्या हुआ? यह बयान सुनकर चौंक क्यों गए ?

आप नहीं जानते कि जिन दंगाइयों ने मेरे प्रांगण में आकर हल्ला मचाया और हमला किया उन्होंने एक लोकल व्यापारी के ढाबे पर भी आग लगा दी वो भी महज़ इस कारण से कि वह व्यापारी मुसलमान था। अब इस पूरे मामले में पुलिस प्रणाली ने जिन लोगों को गिरफ्त में लिया है उनमे से आधे लोग दिल्ली, गाज़ियाबाद, नॉएडा और गुरुग्राम जैसे क्षेत्रों से हैं।

सब दंगा मचा रहे थे पर इस दंगे में निकिता और उसका इंसाफ पीछे छूट गया। चाहे वह राजनेता हो या फिर अन्य कोई प्रदर्शनकर्मी अब निकिता के नाम की आड़ में बस राजनीति की जा रही है। उम्मीद है कि प्रशासन, न्याय प्रणाली और जनता इस पूरे मामले की संजीदगी को ध्यान में रखेंगे। निकिता के साथ इंसाफ हो यह हम सब चाहते हैं पर उसके नाम की आड़ में खेले जा रहे जुर्म के खेल से परहेज़ करना जरूरी है।

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