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दुनिया की पहली रेल जो बादलों में चलती है हर किसी के बस का नहीं इसमें सफर करना

क्या आपने कभी बादल में चलने वाली रेल में सफर किया है, अब आप इसे एक कल्पना मात्र मान रहे होंगे। वैसे देखा जाए तो होता भी ऐसा ही है। क्योंकि जो बात और चीज़ हमारे बस की नहीं होती है उसे हम कल्पना मात्र ही मानने लग जाते हैं और अगर अचानक से कभी वो चीज़ फलीभूत हो जाती है तो हम उसे जादू, चमत्कार आदि का नाम देने लगते हैं।

चलिए अब इस कहानी से पर्दा उठाते हैं। वैसे तो रेलगाड़ी का सफर बहुत ही मज़ेदार होता है, लेकिन कहीं-कहीं यही मज़ेदार सफर सिर्फ और सिर्फ ख़तरे से भरा ही होता है क्योंकि वहां के हालात ही कुछ ऐसे होते हैं।

अगर आपने पहाड़ी इलाकों में बाइक, बस, कार आदि से सफर किया है तो आप इस बात का अंदाज़ा बड़े ही आराम से लगा सकते हैं कि पहाड़ी इलाकों का सफर कितना ख़तरनाक हो सकता है।

जानकारी के लिए बतादें कि ट्रेन ऑफ़ क्लाउड्स इस यात्रा को कहा जाता है जो पहाड़ों में होती है और काफी ख़तरनाक होती है।

बतादें कि एंडीज पर्वतमाला से गुजरने वाला रास्ता उतर पश्चिमी अर्जन्टीना से होता हुआ चिली की सीमा तक जाता है। जहां रेलवे का रूट 1948 में बनाया गया था। और इसे बनाने के लिए 27 साल का समय लगा था। 4220 मीटर की उंचाई पर काम करना इंजीनियरों और मजदूरों के लिए काफी मुश्किल भरा और खतरे से भरा काम था।

आपको बता दे की ये ट्रैक ऑस्ट्रेलिया में बैरोन गोर्ज नेशनल पार्क से होकर गुजरता है। सबसे ख़ास बात ये है कि इस ट्रैक के पास में ही एक बड़ा वॉटर फॉल है।

जब ट्रेन इस ट्रैक से गुजरती है तो झरने का पानी ट्रेन में यात्रियों को भिगोने में कोई कसर नहीं छोड़ता है, लेकिन यात्रियों को इससे डर भी लगता है और वो रोमांचित भी होते हैं। क्योंकि यहाँ से आस-पास का नज़ारा बहुत ही खूबसूरत होने के साथ ही बहुत ही ज्यादा खतरनाक भी है।

चाहे जो हो लेकिन ये भारत का सबसे शानदार ट्रैक कहा जाता है, जो अपने आप में इंजीनियरिंग का शानदार नमूना भी कहा जाता है। ये ट्रैक चेन्नशई से रामेश्वहरम् तक सीधे जाता है।

ये ट्रैक समुंद्र तल पर बनाया गया है। कई बार पानी का स्तकर बढ़ने पर ट्रेन पानी को चीरते हुये आगे बढ़ती है। जिससे डर भी बहुत लगता है, लेकिन जब इस मंज़र को आप पार कर जाते हैं तो आपको रोमांच की अनुभूति भी खूब होती है।

अगर आप भी इस तरह के सफर का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो इस ट्रैक पर चलने वाली ट्रेन का सफर अपने जीवन में कम से कम एक बार तो ज़रूर करें और फिर यकीन मानिए आप भी अपने इस अनुभव को आप सभी से साझा करने के लिए लालायित हो जाएंगे।

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