कोरोना महामारी के बड़े गम्भीर संकट के बीच इस वर्ष का दिवाली का त्यौहार पूरी तरह से एक अलग ही अंदाज़ में पूरे देश में मनाया गया,
जिसमें कुछ बहुत ही नवीन विशेषताएं थीं, जिनमें चीनी सामानों का पूर्ण बहिष्कार, भारतीय सामानों का बड़े पैमाने पर उपयोग के साथ-साथ भारत में आठ महीने का व्यापार का निर्वासन समाप्त हुआ।

जिसकी वजह से भारत में बने सामानों की रिकॉर्डतोड़ बिक्री दर्ज हुई है। देश में कारोबारियों के सबसे बड़े संगठन ने बताया है कि इस दिवाली 72 हजार करोड़ रुपये का माल बेचा है।
दिवाली जैसे बड़े त्योहार में भारतीय बाजारों में हमेशा चीन के माल पटे पड़े रहते थे, चीन की लाइट्स से लेकर साजो सामान तक चीन का कब्जा रहता था, लेकिन इस साल हालात बिल्कुल उलट हैं। इस दिवाली में भारतीय कारोबारियों ने करीब 72 हजार करोड़ रुपये की बिक्री की, जिससे चीन को 40 हजार करोड़ रुपये का झटका लगा है।
वहीं आपको बता दे कि भारत में गाय के गोबर से 33 करोड़ दीये बनाने की घोषणा के बाद चीन की ट्विटर कही जाने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म वीईबो पर गाय के गोबर लैंप की खूब चर्चा चल रही है। चीन को इस बात की आशंका है कि इस प्रकार के भारतीय कार्यक्रम से उनका आयात प्रभावित होगा।
हाल ही में राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने इस वर्ष दिवाली से पहले गाय के गोबर से 33 करोड़ दीये बनाने की घोषणा की है। एक अनुमान के अनुसार दिवाली के त्योहार के दौरान करीब 90% लाइटिंग का इस्तेमाल करने के लिए चीन से आयातित होती थी।
कामधेनु आयोग के अनुसार ऐसा बताया जा रहा है कि देश के 15 राज्य गाय के गोबर से दिए बनाने के कार्यक्रम के लिए तैयार हो गए हैं। इसी बीच चीन का ऐसा कहना है कि भारत बिना जांचे-परखे मेक इन इंडिया कार्यक्रम को प्रोत्साहित कर रहा है।
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