Pehchan Faridabad
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कोरोना सर्वाइवर : एक दूसरे का साथ और डॉक्टरों के आत्मविश्वास की वजह से जीती कोरोना की जंग

ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का नाम हैं

मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं


इमाम बख़्श नासिख़ के इस शेर को नजीर बनाकर पेश किया उन तमाम लोगों ने जिन्होंने कोरोना को हराकर अपने घर वापसी की ,आज फरीदाबाद में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 176 है जिसमें से 88 लोग ठीक हो कर घर जा चुके हैं और अभी 68 मरीज इस भयावह बीमारी से जूझ रहे हैं पहचान फरीदाबाद की टीम ने आज कोराना पॉजिटिव पाए गए पहले कपल बसंत गौड़ और उनकी धर्मपत्नी कल्पना गौड से बात की उन्होंने इस कोरोनावायरस अनुभव को साझा करते हुए बहुत सारी बातें हमें बताएं हमने उनके सफर को उन्हीं की जवानी सुना जिसके बारे में मात्र सोचा जा सकता था इस कोरोना वॉरियर्स कपल ने हमारे साथ अपने अनुभव शेयर किए।

कोरोना वायरस कहां से मिला ।

कल्पना गौड़ ने बताया कि 18 मार्च को उनके पति बसंत गौड ग्वालियर से वापस आए तो उनके गले में कुछ खराश थी उसी समय उनका बेटा दुबई से वापस आया था पर उसने उनसे उचित दूरी बनाकर रखी बसंत जी के गले में खराश होने की वजह से कल्पना भी इससे इफेक्ट हुई उसके बाद कल्पना को भी हल्की सी खराश होने लगी जब स्थिति दवाई लेने से कंट्रोल नहीं हुई तो उन्होंने अपने टेस्ट कराएं और वह दोनों कोरोनावायरस पाए गए।

जब पता लगा कि कोरोना पॉजिटिव है ।

जब यह बात पता चली कि हम दोनों कोरोनावायरस पॉजिटिव है तो हम पर पहाड़ सा टूट गया हम काफी घबरा गए थे कि अब क्या होगा मिसेज गौड़ ने बताया कि हर इंसान को लगता है कि हमें यह बीमारी नहीं हो सकती पर जब हम लोग पॉजिटिव पाए गए तो यकीन हुआ कि बीमारी किसी को भी हो सकती है इंसान हमेशा सामाजिक भेदभाव से डरता है अनेकों लोगों की तरह उनके मन में भी यही डर लगातार बना हुआ था अब हमसे लोग दूर जाने लगेंगे पर अब यह जंग जीतनी हैं यह तय था ।

स्वयं से ज्यादा डर अपनों का लगता है

जब हम को पता चला कि हमारे टेस्ट पॉजिटीव हैं तो उनको यह डर सताने लगा कि कहीं उनका बेटा भी तो प्रभावित ना हो क्योंकि वह एक बार उनके संपर्क में आया था पर जब बेटे का टेस्ट किया गया तो वह भी नेगेटिव पाया और दोनों ने राहत की सांस ली।

सरकारी अस्पताल का अनुभव रहा सुखद

फरीदाबाद से दिल्ली और दिल्ली से फरीदाबाद के चक्कर काटकर फरीदाबाद के ईएसआई अस्पताल में खुद को एडमिट कराया वहां पर जब हॉस्पिटल के अंदर प्रवेश कर रहे थे तब लोग इस तरह से उनसे दूर भाग रहे थे जैसे उन्होंने कोई अनचाहा कृत्य किया हो ।

मेडिकल स्टाफ ने दिया साथ ।

उन्होंने बताया कि जब एडमिट होने के लिए पहुंचे थे उनका अनुभव थोड़ा अजीब था लोगों के डर ने और डरा दिया था जब वह अपने बेड पर पहुंचे तो उनकी हालत रोने जैसी हो गई थी आइसोलेशन वार्ड में सबसे पहले उनकी मुलाकात वहां की नर्स ज्योति हुड्डा से हुई ज्योति के विश्वास ने उनके आत्मबल को और बढ़ा दिया हॉस्पिटल के मेडिकल स्टाफ ने भरपूर सहयोग के साथ ट्रीटमेंट शुरू किया। डॉ प्रीति भाटी ने अपने अंदाज में आत्मविश्वास बढ़ा कर लड़ने की ताकत दी हॉस्पिटल में सभी मेडिकल स्टाफ एक फोन पर अवेलेबल रहा और हर समय हम पर नजर रखी गई , ताकि हम इस लड़ाई को जीत जाए

आपसी सहयोग के साथ से जीती जंग

मिस्टर एंड मिसेस गौड़ ने एक दूसरे की हिम्मत बढ़ाई और वादा किया कि एक साथ ठीक होकर ही घर वापस जाएंगे आपसी अनुराग ने इस बीमारी से लड़ने की ताकत दी

पॉजिटिविटी फैलाने की करी शुरुआत

कल्पना ने बताया कि सभी लोगों का सहयोग अद्भुत था सब हमारी चिंता कर रहे थे तो हमने इस नेगेटिव टाइम में पॉजिटिविटी देने के लिए हमने गानों का सहारा लिया अपने सभी रिश्तेदार और साथियों को गानों की वीडियो के माध्यम से पॉजिटिविटी फैलाने का काम किया, धीरे धीरे हम को लेकर उनकी जो मानसिक स्थिति थी वह सामान्य हुई और निश्चिंत रह सके वही साथ ही हॉस्पिटल में रहकर योगसन कर खुद को फिट करने का प्रयास किया अत्यंत लाभकारी साबित हुआ ।

घर वापस आने पर मिली राहत

4 अप्रैल से 17 अप्रैल तक हॉस्पिटल की जर्नी काफी खास रही वहां पर डॉक्टरों द्वारा बढ़ाई गई हिम्मत ने जीवन की इस सबसे मुश्किल घड़ी को टाल दिया और हमें भयावह बीमारी से बाहर निकाल कर स्वस्थ करके हमें वापस घर भेजा ,आज छोटे-मोटे जीवन में बदलाव जरूर है पर हम इस जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई को जीत गए हैं हमारे पास आने वाली पीढ़ी के लिए एक कहानी है जिसे एक बार जरूर अपने बच्चों के बच्चों को सुनाया जाएगा हम अब सभी से अपील करते हैं कि आप लोग भी घबराएं नहीं कोरोना से डरने की नहीं लड़ने की जरूरत है

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