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कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में शोध कर रहे भारतीय मूल के वैज्ञानिकों ने दुनिया को दिया लॉक डाउन का अनोखा फॉर्मूला

वैश्विक महामारी घोषित हो चुका कोरोना वायरस 200 से भी अधिक देशों में अपनी पकड़ बना चुका है और लाखों लोगों की जान अब तक इस वायरस के चलते जा चुकी है। इस वायरस से बचाव के लिए भारत के साथ साथ दुनिया भर के कहीं बड़े देशों ने देशव्यापी लॉक डाउन की घोषणा की हुई है। जिसको करीब 2 महीनों से भी अधिक समय बीत चुका है। कोरोना संकट काल के कारण लिए गए लॉक डाउन के निर्णय से विश्व के सभी बड़े देशों की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है और लोगों को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में भारतीय मूल के शोधकर्ता राजीव चौधरी और उनकी टीम ने उनके द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह फॉर्मूला सुझाया है कि जब तक कोरोना वायरस का इलाज नहीं खोज लिया जाता, तब तक देशों को ‘50 दिन बंद, 30 दिन छूट’ का नियम अपनाना चाहिए।

इस अध्ययन के मुताबिक, 50 दिन तक सख्त लॉकडाउन अपनाया जाए, जिसमें किसी तरह की छूट लोगो को न दी जाए। इसके बाद 30 दिन के लिए सोशल डिस्टेंसिंग व दूसरे नियमों के साथ लॉकडाउन खोल दिया जाए। इस तरह कम से कम डेढ़ साल तक यह चक्र अपनाया जाए क्योंकि यदि वैक्सीन कि खोज कर भी ली जाती है तो उसके सफल परीक्षण से लेकर उसे लोगो तक पहुंचाने में कम से कम 1.5 साल का समय लगना अनिवार्य है।

इस फॉर्मूला के अपनाए जाने से लोगों की कोरोना वायरस की चपेट में आने की आशंका भी कम होगी और अर्थव्यवस्था भी धीमी ही सही लेकिन चलती रहेगी। यूरोपियन जर्नल ऑफ इपीडीमिलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में दावा किया गया है कि दुनिया की सरकारों द्वारा यह फॉर्मूला अपनाने से वायरस को अधिकतम 0.8 के औसत तक रोका जा सकता है।

फिलहाल इस वायरस से बचने का सबसे सफल इलाज लॉक डाउन को ही माना जा रहा है लेकिन जिस प्रकार सभी देशों की सरकारें लॉक डाउन लगा रही है उस तरीके से कोई भी देश अधिक समय तक देश बंदी की स्थिति का सामना नहीं कर पाएगा और लोगों की समस्या के साथ-साथ देश को अर्थव्यवस्था में गिरावट एवं कई अन्य बुरे परिणाम देखने पड़ सकते हैं।

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