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नन्हे-मुन्ने बाल एवं युवा कलाकारों को सरस्वती पूजन की विधि एवं बसंत पंचमी से अवगत कराया गया


सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र वसुंधरा द्वारा दिनांक 16 फरवरी 2021 को भोपानी स्थित परिसर में बसंत पंचमी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संगीत कला केंद्र की चेयरपर्सन श्रीमती अनुपमा तलवार जी एवं अन्य अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। दीप प्रज्वलन के पश्चात विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना एवं अन्य गीतों की प्रस्तुति दी।

फरीदाबाद से स्वाति जैन ने राग यमन पर आधारित एक गीत प्रस्तुत किया। गौरव भटनागर ने बसंत राग में छोटा ख्याल प्रस्तुत किया एवं इसके अतिरिक्त अन्य बच्चों ने भिन्न-भिन्न गीत प्रस्तुत किए।

नन्हे-मुन्ने बाल एवं युवा कलाकारों को सरस्वती पूजन की विधि एवं बसंत पंचमी से अवगत कराया गया


श्रीमती अनुपमा तलवार ने दिल्ली, फरीदाबाद से आए हुए सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को अपने बहुमूल्य वचनों से अनुग्रहित किया।
प्रधानाचार्य श्री दीपेंद्र कांत ने अपने संबोधन में सभी विद्यार्थियों को बसंत पंचमी मनाने के कारण बताते हुए कहा कि बसंत पंचमी को ज्ञान पंचमी या श्री पंचमी भी कहते हैं।

शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। आज के दिन ज्ञान और वाणी की देवी मां सरस्वती की विधि पूर्वक पूजा की जाती है।

मां सरस्वती की कृपा से ही व्यक्ति को ज्ञान बुद्धि, विवेक के साथ विज्ञान कला और संगीत में महारत हासिल करने का आशीष मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्ञान और वाणी की देवी मां सरस्वती माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही ब्रह्मा जी के मुख से प्रकट हुई थी।

इस वजह से ही बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन आराधना करने से माता सरस्वती जल्द ही प्रसन्न होती हैं। बसंत पंचमी का दिन शिक्षा प्रारंभ करने, नई विद्या, कला, संगीत आदि सीखने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। छोटे बच्चों को इस दिन अक्षर ज्ञान कराया जाता है।कहा जाता है

कि सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़ पौधे और जीव जंतु सब कुछ दिखाई दे रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुई।

उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थी मां सरस्वती । मां सरस्वती ने जब अपनी वीणा को बजाया तो संसार की हर चीज में स्वर आ गया जिससे उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती । तब से देवलोक और मृत्यु लोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी।


आप सभी को वीणा वादिनी मां सरस्वती स्वर और ताल प्रदान करें। इसी के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन पंडित केशव शुक्ला जी ने किया।
इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में मिस्टर संजय बिडलान, रूपाली वैश,सोनिया नागपाल ,कविता मिनोचा आदि लोग उपस्थित हुए।।

Avinash Kumar Singh

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