महामारी के खिलाफ लड़ाई में हमारे सबसे बड़े सहायक हमारे प्लाज्मा डोनर जोकि खुद महामारी से जंग लड़कर और जीत कर आए हैं। लेकिन इस महामारी की वजह से कई लोगों ने अपने परिजनों को भी खो दिया है।
ऐसे ही एक योद्धा से आपको हम भी लाना चाहेंगे जिसने महामारी की चपेट में आने से अपनी मां को गवा दिया और उसी मां को श्रद्धांजलि देने के लिए वह प्लाज़्मा डोनेट करते हैं।

फरीदाबाद के रहने वाली विनोद अरोड़ा ने बताया कि वह मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करते हैं व उनकी पत्नी भी एक निजी कंपनी में नौकरी करती है। अक्टूबर के महीने में उनकी पत्नी के ऑफिस में कई लोग महामारी की चपेट में आ गए।
जिसकी वजह से उनकी पत्नी भी बीमार रहने लगी। लेकिन उनको पता नहीं चला था कि वह महामारी की चपेट में आ चुकी है और उसके बाद उनके परिवार में सभी इसकी चपेट में आने लगे। उनकी मां भी महामारी की वजह से ग्रस्त हो गई।
लेकिन वह यह जंग नहीं जीत पाई और नवंबर के महीने में उन्होंने अपनी मां को खो दिया। उन्होंने बताया कि उनकी एक छोटी सी एन जी ओ है जिसका नाम है मां मम्मी और अम्मा। उस एनजीओ के माध्यम से वे लोगों से गुजारिश करते हैं कि ज्यादा ज्यादा लोग प्लाज्मा डोनेट कर महामारी की चपेट में आए लोगों की रक्षा करें।
इसी मुहिम में उन्होंने भी अभी तक चार से पांच बार प्लाज्मा डोनेट कर कई लोगों की जान बचाई है। विनोद अरोड़ा ने बताया कि जब मुड़ के देखते हैं तो सबसे ज्यादा समझते है किसी और की घर में इस त्रासदी से कोई अपने को खो ना दें।
इसीलिए उन्होंने अपनी माता को श्रद्धांजलि के तौर पर निरंतर प्लाजमा डोनेशन देने की ठानी। इसी क्रम में उन्होंने प्लाज्मा डोनेशन से एक प्रेग्नेंट महिला जोकि महामारी से जंग लड़ रही है के लिए संत भगत सिंह चैरिटेबल प्लाजमा बैंक में दिया।
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