महामारी के बढ़ते मामलों के बीच टीकाकरण को रामबाण के रूप में देखा जा रहा है परंतु अभी तक जिले के निजी अस्पतालों में टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई है। निजी अस्पताल संचालकों ने महामारी की वैक्सीन खरीदी ही नहीं है।
दरअसल, जिले में महामारी के 18+ के लिए टीकाकरण की प्रक्रिया पिछले हफ्ते से शुरू हो गई है। जिले भर के तमाम स्वास्थ्य केंद्र तथा सरकारी अस्पतालों में लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है परंतु अभी तक निजी अस्पताल संचालकों ने वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को शुरू ही नहीं किया है। प्रक्रिया ना शुरू होने के चलते वैक्सीन लगवाने के लिए लोग पूरी तरीके से सरकारी स्वास्थ्य केंद्र तथा अस्पतालों पर निर्भर है।

ज्ञात रहे कि 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लिए वैक्सीनेशन प्रक्रिया जब शुरू हुई थी तो निजी अस्पताल संचालकों को वैक्सीन सरकार की ओर से मुहैया कराई गई थी परंतु इस बार वैक्सीन स्वयं खरीदने के आदेश निजी अस्पताल संचालकों को दिए गए थे। वैक्सीन की कीमत 250 रुपए रखी गई थी। टीकाकरण के इस चरण में निजी अस्पताल संचालकों को वैक्सीन स्वयं ही खरीदनी पड़ेगी।
फरीदाबाद के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन लगाई जा रही है जिससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होते ही स्लॉट बुक हो जाता है। निजी अस्पतालों में प्रक्रिया शुरु ना हो पाना लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों की ओर से निजी अस्पतालों के लिए वैक्सीन की कीमत तय की गई है परंतु निजी अस्पताल संचालक वैक्सीन के लिए आगे नहीं आ रहे वही वैक्सीन की पहली डोज लगवा चुके लोगों को भी दूसरी डोज का इंतजार करना पड़ रहा है।
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