पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से चंडीगढ़ के निजी स्कूलों को बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने अपने 107 पेज के फैसले में आदेश दिया है कि स्कूलों को वेबसाइट पर आय व्यय संबंधी बैलेंसशीट अपलोड करनी होगी। यह भी कहा है कि स्कूल से कमाया गया मुनाफा स्कूल के विकास पर ही खर्च करना होगा स्कूल से हुई कमाई को दूसरी जगह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के इन फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल से कहा है कि वह हरियाणा शिक्षा नियमावली 2003 में संशोधन करा कर इस प्रकार की व्यवस्था हरियाणा के अभिभावकों के हित में भी कराएं।
मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा व प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा है कि मंच की ओर से इस बारे में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की गई है कि हरियाणा में भी ऐसा नियम कानून बनाया जाए कि सभी प्राइवेट स्कूल अपनी वेबसाइट पर आय व्यय संबंधी बैलेंस शीट अपलोड करें।
मंच ने अपने पत्र में यह भी मांग की है कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा डाले गए आय व्यय के ब्यौरे व बैलेंस शीट की सीएजी से जांच कराई जाए जिससे पता चल सके कि अभिभावकों से वसूली गई फीस का सदुपयोग हुआ है या दुरुपयोग। मंच का कहना है कि हरियाणा सरकार ने अगर कोई उचित कार्रवाई नहीं की तो मंच पंजाब एंड हाई कोर्ट का सहारा लेगा।
बता दें कि पिछले साल चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा निजी स्कूलों से अपने बैलेंस शीट वेबसाइट पर अपलोड किए जाने के आदेश को निजी स्कूलों की संस्था इंडिपेंडेंट स्कूल्ज एसोसिएशन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी, उस पर केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन का बचाव करते हुए कहा था कि केंद्र के पास यह अधिकार है कि वह किसी भी एक्ट में संशोधन और बदलाव के साथ उसे लागू कर सकती है।
ऐसे में निजी स्कूलों की दलील कि पंजाब रेगुलेशन आफ फीस आफ अनएडिड एजुकेशन इंस्टीट्यूशनल एक्ट में बदलाव कर इसे चंडीगढ़ में लागू कर दिया गया पूरी तरह से गलत है। केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ़ इंडिया सत्यपाल जैन ने कहा था कि जब निजी स्कूल छात्रों के अभिभावकों से ली गई फीस पर ही चलते हैं तो अभिभावकों को भी यह अधिकार है कि वह स्कूल की बैलेंसशीट देख सकें।
जैन ने कहा कि अब निजी स्कूल इंडस्ट्री की तरह बनते जा रहे हैं ऐसे में इन पर लगाम लगाना जरूरी है जहां तक केंद्र के एक्ट में संशोधन और बदलाव की बात है कि केंद्र के पास इसका अधिकार है। जस्टिस जसवंत सिंह पर आधारित डिवीजन बेंच ने इस मामले में शुक्रवार को सुरक्षित रखे फैसले को सुनाते हुए स्कूलों की मांग खारिज कर दी।
प्रशासन की दलील थी कि 40 के करीब निजी स्कूल अपनी बैलेंसशीट अपलोड कर चुके हैं, कुछ निजी स्कूलों ने ऐसा नहीं किया था जिसके चलते उन्हें नोटिस भेजे गए थे, लेकिन नोटिस का जवाब देने के बजाय इन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। लिहाजा, प्रशासन ने इसी दलील के साथ इस याचिका को खारिज किए जाने की मांग की थी।
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