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खेलकूद के प्रति युवाओं के बढ़ते रुझान को देख अब खेल पॉलिसी में हरियाणा सरकार ने किए नए बदलाव

जिस हरियाणा के युवाओं में खेलकूद के प्रति छिपी प्रतिभा को बाहर आते हुए और निखरते हुए देखा गया है, यह बात पूरे भारत या यूं कहें कि विश्व में भी छाप छोड़ रहे हैं। जिस तरह ओलंपिक में इतिहास रचने वाले नीरज चोपड़ा ने जहां एक और देश का नाम रोशन किया था। वहीं कहीं ना कहीं युवाओं में भी खेल के प्रति जज्बे को पैदा करने में अपनी अनोखी रूपरेखा तैयार की। अब इसी पर हरियाणा सरकार द्वारा नए परिवर्तन किए जाने हैं।

दरअसल, खेल विभाग के निदेशक पंकज नैन ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सरकार सीधी भर्ती में खिलाड़ियों का 3 प्रतिशत कोटा खत्म कर सकती है। जिसके लिए विभाग द्वारा चीफ सेक्रेटरी को प्रपोजल भेजा गया है। 2500 ग्रेडेशन सर्टिफिकेट में गड़बड़ी के बाद ये फैसला लिया गया है।

पॉलिसी में बदलाव की मुख्य वजह पद का नाम माना जा रहा है. ओलंपियन (Olympian) को भी सीनियर कोच और अन्य खिलाड़ियों को भी कोच या जूनियर कोच की पोस्ट मिल रही है। इन दोनों नामों में ज्यादा फर्क नहीं है, इसलिए मेडल के अनुसार पद व पदनाम दिए जायेंगे जिसकी प्रारंभिक चर्चा की जा रही है. स्पेशल ओलंपिक के खिलाड़ियों को नौकरी के बजाय पेंशन का प्रावधान भी तैयार किया जा सकता है।

बता दें, कि खेल विभाग की जांच में करीब 2500 ग्रेडेशन सर्टिफिकेट में गड़बड़ियां मिली हैं। इसकी जांच विजिलेंस से कराने के आदेश भी दिए हैं. 2019 में हुई ग्रुप-डी के 18218 पदों की भर्ती में 1518 पद खिलाड़ियों के लिए निर्धारित थे। जांच में काफी संख्या में ग्रेडेशन सर्टिफिकेट सही नहीं मिले हैं। इसलिए खेल विभाग के जरिए ही खिलाड़ियों की भर्ती करने की तैयारी चल रही है।

खेल विभाग ने इसी साल फरवरी में खिलाड़ियों की जॉब पॉलिसी से एचसीएस-एचपीएस के पद हटा दिए थे. खेल विभाग में पद तय किए थे. इसके अनुसार, ग्रुप-ए में डिप्टी डायरेक्टर के 50 ग्रुप-बी में सीनियर कोच के 100, ग्रुप-बी में कोच के 150 और ग्रुप-सी में जूनियर कोच के 250 पद निर्धारित हैं. इन पदों पर सिर्फ खिलाड़ी ही भर्ती किए जाएंगे।

खेल विभाग ने स्पोर्ट्स एलिजिबल पर्सन जॉब पॉलिसी में बदलाव की बड़ी वजह यह मानी जा रही है, कि इसमें ओलिंपियन को भी जहां सीनियर कोच की पोस्ट मिल रही है। वहीं नेशनल व अन्य गेम्स के खिलाड़ी को भी कोच का पद मिल रहा है. दोनों का नामों में ज्यादा फर्क नहीं है। इसीलिए मेडल के अनुसार ही पद दिए जाएंगे।

Avinash Kumar Singh

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