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किसान आंदोलन : हाड़ गलाने वाली ठंड भी नही तोड़ पाई किसान के इरादे , 11 बजे के बाद पड़ती है ओस

अपने हक़ की लड़ाई किसान सरकार से लड़ते हुए बोल रहा है की जो काले कानून बनाये है.उनको वापस ले ताकि किसानो को राहत मिल सके.जहा सरकार के खिलाफ खड़े किसान को डट कर खड़े है. वही एक और मुसीबत किसानो को घेरे हुए है जिससे लड़ना मुश्किल तो है पर नामुमकिन नहीं है ।

बता दे की आंदोलनरत किसान इस समय दिल्ली को सीमा पर डट कर बैठा है और अपनी बात को पुख्ता तरीके से रख रहा है. वही जयपुर हाईवे के शाहजंहापुर पर राजस्थान के किसानो का काफिला अपना आशियाना बना कर रुका हुआ.दिसंबर की सर्दी भी अपने पुरे चरम पर है।

राजस्थान के शाहजहांपुर बॉर्डर पर इस सर्दी की रातो में डेरा डाल कर बैठा है इस समय सर्दी का तापमान 6’C होता है लेकिन किसान के इरादे किसान की हिम्मत को कम नहीं होने दे रहे है. एक मिडिया रिपोर्ट के अनुसार इतनी ठंड के में किसान खेतो के बीच लगे टेंट में रहे है.

किसानो का कहना है की रात 11 बजे के बाद ओस की बूँदे पड़ने लगती है और किसानो की रजाई गद्दे सब गीले हो जाते है और उसके कारण सब को सुबह के 4 बजे ही उठना पड़ता है और उनको खेतो के पास आलाव जलाकर बैठना पड़ता है

वही अगर बात की जाये की तो सामाजिक कार्यकर्ता अपना पर योगदान कर रहा है योगेन्द्र यादव भी दिन-रात किसानों के बीच में हैं। वे भी रात को यहां टेंट के नीचे सोते हैं। ओस की बूंदों से भीगते हैं। अलाव के आगे बैठकर किसान नेताओं से चर्चा करते दिख जाते हैं। उनका कहना है कि किसानों के हित में सरकार झुकने को तैयार नहीं हैं, लेकिन अब किसानों ने भी ठान लिया है कि पीछे नहीं हटेंगे।

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