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फरीदाबाद: नगर निगम अधिकारियों पर नीरज शर्मा के कसा शिकंजा, भ्रष्टाचारियों के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो को लिखा पत्र


नगर निगम में 200 करोड़ रुपये के बिना काम भुगतान घोटाले को विधानसभा में उठाने करने वाले कांग्रेस विधायक नीरज शर्मा का कहना है कि सिर्फ मुख्य अभियंता दौलतराम भास्कर को पकड़कर ही भ्रष्टाचार का खात्मा नहीं होगा। भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुंचकर बड़े मगरमच्छ काबू करने होंगे।

फरीदाबाद: नगर निगम अधिकारियों पर नीरज शर्मा के कसा शिकंजा, भ्रष्टाचारियों के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो को लिखा पत्र
फरीदाबाद: नगर निगम अधिकारियों पर नीरज शर्मा के कसा शिकंजा, भ्रष्टाचारियों के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो को लिखा पत्र

कांग्रेस विधायक नीरज शर्मा ने स्टेट विजिलेंस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर को लिखे पत्र में कहा है कि डीआर भास्कर तो इस तरह के घोटाले में सिर्फ एक कड़ी है। इस कड़ी के अहम सदस्यों तक भी विजिलेंस जब तक नहीं पहुंचेगी, तब तक नगर निगम का भ्रष्टाचार पूरी तरह उजागर नहीं होगा। एक मुख्य अभियंता के स्तर पर 200 करोड़ रुपये का घोटाला नहीं हो सकता। भ्रष्टाचार के इस खेल में बड़े अधिकारी, राजनेता भी शामिल रहे हैं। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो इन तक भी शिकंजा कसे ताकि भविष्य में भ्रष्टाचार करने वालों के पैर कांप जाएं।


बता दें, नीरज शर्मा ने नगर निगम के भ्रष्टाचार का मुद्दा विधानसभा के बजट सत्र में उठाते हुए 22 मार्च को प्रण लिया था कि जब तक बिना काम भुगतान घोटाले में एक भी आरोपी को नहीं पकड़ा जाएगा जब तक वे अपने अंग पर सिले हुए कपड़े धारण नहीं करेंगे। इसके अलावा पैरों में जूते भी नहीं पहनेंगे। इस प्रण के बाद ही राज्य सरकार ने पहले 200 करोड़ रुपये घोटाले के मुख्य आरोपी सतबीर ठेकेदार को गिरफ्तार किया और बाद में शुक्रवार देर सायं मुख्य अभियंता डीआर भास्कर को गिरफ्तार किया। भास्कर ने इससे पहले अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की थी मगर जिला अदालत ने इसे अस्वीकार किया।

फरीदाबाद: नगर निगम अधिकारियों पर नीरज शर्मा के कसा शिकंजा, भ्रष्टाचारियों के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो को लिखा पत्र
फरीदाबाद: नगर निगम अधिकारियों पर नीरज शर्मा के कसा शिकंजा, भ्रष्टाचारियों के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो को लिखा पत्र


विधायक नीरज शर्मा ने स्टेट विजिलेंस ब्यूराे महानिदेशक से निम्न मुद्दों पर लगाई गुहार
-घोटाले के पैसों की रिकवरी हो
-जो काम नहीं हुए, उन्हें शीघ्र अतिशीघ्र कराने की व्यवस्था हो
-कोई भी भुगतान होता है तो इसमें लेखा शाखा से लेकर निगमायुक्त तक की संलिप्तता होती है। घोटाले के दौरान तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की भी जांच हो।
-नगर निगम में जो घोटाले अब तक हुए हैं, उनमें भी इनका योगदान रहा है।
-नगर निगम में जो रिकार्ड रूम जला है, उनमें भी इन आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जाए।

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