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कहते तो है स्मार्ट सिटी, पर है प्रदूषित सिटी फरीदाबाद

5 जून यानी विश्व पर्यावरण दिवस है। कई जगह कार्यक्रम होंगे, भाषण दिए जायेंगे । हवा खराब है, सांस लेना मुश्किल हो रहा है, ऐसी बातें की जाएंगी। पौधे भी लगाए जाएंगे, लेकिन पेड़ बनने तक इन की देखभाल के बारे में कोई नहीं सोचेगा। इस बारे में कोई चर्चा नहीं होगी कि हवा नहीं, हमारी आदतें खराब हैं। हवा तो शुद्ध है, उसे दूषित बनाया जा रहा है। यही कारण है कि फरीदाबाद आए दिन देश में प्रदूषित शहरों की सूची में टॉप पर रहता है।

दुनियाभर के कई देशों में प्रदूषण का आंकलन करने वाली संस्था आईक्यू एयर की रिपोर्ट में भी पिछले दिनों फरीदाबाद दुनिया का 12वां सबसे प्रदूषित शहर था । आईक्यू एयर ने 117 देशों के 6 हजार से अधिक शहरों में प्रदूषण का अध्ययन कर रिपोर्ट जारी की थी। यह रिपोर्ट 2021 में किए गए अध्ययन के आधार पर जारी हुई थी, जिसके अनुसार 2021 में फरीदाबाद में पीएम 2.5 का औसत स्तर 88.9 दर्ज किया गया था।

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क्या कारण है जो प्रदूषण ये रूप ले रा है?

फरीदाबाद में प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण सड़कों पर उड़ती धूल है। गाड़ियों व इंडस्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, कूड़े में लगने वाली आग भी प्रदूषण के मुख्य कारण है। लोग घरों से थोड़ी दूर जाते है तो बाइक व गाड़ी आदि लेकर जाते हैं। घरों से निकलने वाले कूड़े को हम डस्टबिन या गारबेज कलेक्शन पॉइंट पर ले जाने की।

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जगह उसे जला देते हैं। इससे हवा दूषित होती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। फरीदाबाद में पराली जलाने के मामले न के बराबर हैं, लेकिन कुछ किसान भी फसलों की कटाई के बाद थोड़े अवशेष जला देते हैं।

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दावा है कि वन विभाग ने 8 लाख पौधे लगाए हैं, लेकिन संरक्षण के अभाव में उनमें से आधे पौधे भी जीवित नहीं हैं। इन पौधों में से आधों को भी जीवित रखा जाता तो हरियाली बढ़ सकती है।

और ये बोलते है की हम अपनी जिम्मेदारी निभा रहे है

प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी जिन पर है, उनसे बात करो तो पता चलता है कि वह अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में साफ हवा के लिए लोगों को ही पहल करनी होगी।

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल ऑफिसर दिनेश के अनुसार, औद्योगिक इकाई में प्रदूषण फैलाने से संबंधित सूचना मिलती है तो तुरंत कारवाई की जाती है। हम लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जागरूक करते हैं।

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वहीं, जिला वन अधिकारी राजकुमार का कहना है कि हम हर साल पौधे लगाते हैं और देखरेख भी करते हैं। बिना मंजूरी कोई पेड़ काटा जाता है तो कार्रवाई भी होती है।

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