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फरीदाबाद में नगर निगम की नई पहल, जर्मन तकनीक से होगी सीवरेज की समस्या दूर

फरीदाबाद में लोग सीवर की समस्या से बेहद परेशान रहते हैं। आय दिन कहीं ना कहीं सीवर का ओवरफ्लो देखने को मिलता है। लेकिन अब नगर निगम ने लोगों की इसी समस्या को दूर करने के लिये जर्मन तकनीक का तरीका अपनाया है। यदि निगम की जर्मन तकनीक पूरी तरह से सफल रही तो सीवर ओवरफ्लो की समस्या पूरी तरह खत्म हो जायेगा ।

नगर निगम जर्मनी की तकनीक से मिर्जापुर और प्रतापगढ़ में दो नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा रहा है। इसका सिविल वर्क लगभग 45 प्रतिशत पूरा हो चुका है। यह दोनो प्रोजेक्ट सीएम अनाउंसमेंट के तहत कराए जा रहे हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 248 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे है।

फरीदाबाद में नगर निगम की नई पहल, जर्मन तकनीक से होगी सीवरेज की समस्या दूर
फरीदाबाद में नगर निगम की नई पहल, जर्मन तकनीक से होगी सीवरेज की समस्या दूर

यह एसटीपी लोगों के लिये फायदेमंद होने वाली है क्योंकी अच्छी बात यह है कि इन दोनों एसटीपी बनने के बाद काफी हद तक पेयजल संकट भी खत्म हो जाएगा। क्योंकि एसटीपी से पानी ट्रीट कर उसे औद्योगिक, कंस्ट्रक्शन साइटों और पार्कों में प्रयोग किया जाएगा।

फरीदाबाद में नगर निगम की नई पहल, जर्मन तकनीक से होगी सीवरेज की समस्या दूर
फरीदाबाद में नगर निगम की नई पहल, जर्मन तकनीक से होगी सीवरेज की समस्या दूर

नगर निगम के एसई ओमवीर सिंह ने बताया कि मिर्जापुर में बनने वाला एसटीपी 80 एमएलडी और प्रतापगढ़ में बनने वाला एसटीपी 100 एमएलडी का है। ऐसे में दोनों एसटीपी की क्षमता 180 एमएलडी की हो जाएगी।

इसके अलावा सेक्टर 25 कृष्णा कॉलोनी में बना डिस्पोजल भी अपग्रेड किया जा रहा है। ओमवीर सिंह ने बताया कि एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार मिर्जापुर और प्रतापगढ़ में बन रहे एसटीपी एसबीआर तकनीक से बनाया जा रहा है। दोनों एसटीपी स्कॉडा सिस्टम के अनुसार काम करेगी।

फरीदाबाद में नगर निगम की नई पहल, जर्मन तकनीक से होगी सीवरेज की समस्या दूर
फरीदाबाद में नगर निगम की नई पहल, जर्मन तकनीक से होगी सीवरेज की समस्या दूर

सीवर का कितना पानी आ रहा है, कितना ट्रीट किया जा रहा है। ट्रीट होने वाले पानी की गुणवत्ता क्या है आदि की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा सकेगी। यही नहीं किसी भी समस्या को ऑनलाइन देखा जा सकेगा।

बता दें लोगों को जो पानी सप्लाई की जा रही है उसमें लोगों की तरफ से बहुत सी शिकायतें आती हैं। लेकिन एसटीपी के आ जाने के बाद से पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए इनलाइजर भी लगाया जाएगा। यह एक प्रकार से सैंपलिंग लैब होगी। उन्होंने बताया कि ट्रीट पानी का प्रयोग उद्योगों, कंस्ट्रक्शन साइटों, पार्कों के रखरखाव और प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए पानी छिड़काव में प्रयोग किया जाएगा।

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