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फरीदाबाद में कई जगह हैं नाम के लाइब्रेरी, रद्दी के समान हैं किताबें, नहीं आता कोई भी छात्र



एक तरफ सरकार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 1200 ई-लाइब्रेरी खोलने की योजना बना रही है। वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन पहले से चल रहीं सामान्य लाइब्रेरी को ही दुरुस्त नहीं कर पा रहा है।

फरीदाबाद में कई जगह हैं नाम के लाइब्रेरी, रद्दी के समान हैं किताबें, नहीं आता कोई भी छात्र
फरीदाबाद में कई जगह हैं नाम के लाइब्रेरी, रद्दी के समान हैं किताबें, नहीं आता कोई भी छात्र

एनआईटी में बनी नगर निगम की अमूल्य चंद्रा लाइब्रेरी में लोगों को पढ़ने के लिए किताबें ही नहीं मिल पाती हैं। इसके अलावा लाइब्रेरी की बिल्डिंग भी पुरानी हो चुकी है। साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में बन रही लाइब्रेरी बनाने की योजना साढ़े 3 साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई है।

सेक्टर-12 में बन रही अटल लाइब्रेरी का काम अभी तक अधूरा पड़ा हुआ है। वहीं, एनआईटी निवासी राजेश का कहना है कि ई-लाइब्रेरी के प्लान पर काम तो हो, लेकिन शहरों में बनी लाइबेरी में भी किताबें व अन्य सुविधाओं पर सिर्फ कागजों में प्लान बनाने के बजाय हालत सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

फरीदाबाद में कई जगह हैं नाम के लाइब्रेरी, रद्दी के समान हैं किताबें, नहीं आता कोई भी छात्र

शहर में नगर निगम द्वारा एक लाइब्रेरी एनआईटी स्थित रोज गार्डन के अंदर चलाई जा रही है। इसकी हालत भी इस समय खस्ताहाल है। शहर में लगभग 10 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स ऐसे हैं जो शहर के कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं।

फरीदाबाद में कई जगह हैं नाम के लाइब्रेरी, रद्दी के समान हैं किताबें, नहीं आता कोई भी छात्र

ये छात्र सिविल सर्विसेज के अलावा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियां करते रहते हैं। ये सभी स्टूडेंट्स नगर निगम के अमूल्य चंद्रा लाइब्रेरी में अपनी पढ़ाई करते हैं, लेकिन इस लाइब्रेरी की हालत काफी खराब हो चुकी है।

कई जगहों पर दरारें भी आ गई हैं। स्थिति ये हो चुकी है कि पिछले 5 सालों से लाइब्रेरी में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या न के बराबर हो गई है। लाइब्रेरी में इतनी पुरानी किताबें हैं कि उन्हें अभी तक अपडेट नहीं किया गया।

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