
बढ़ते प्रदूषण से लोग सांस संबंधी बीमारी के चपेट में आ रहे है वही जो पहले से बीमार है उनकी हालत और खस्ता होती जा रही है। हॉस्पिटल और में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन सही से इलाज नहीं हो रहा है। प्रदूषण में दिवाली के बाद से उछाल आया है जिसमे बीमार लोग और भी ज्यादा समस्या से जूझ रहे है।
दिवाली के बाद से सांस रोगियों की संख्या दोगुनी हो गई है। ऐसे में डॉक्टर्स ऐसे मरीजों की इनहेल और दवाओं की मात्रा बढ़ा रहे है। फोर्टिस हॉस्पिटल के सांस रोग स्पेशलिस्ट डॉक्टर रवि ने बताया कि, पहले से बीमार मरीजों को इनहेल डोज बढ़ाने के साथ ही मुंह व नसों के रास्ते से स्टेरॉइड देने की भी जरूरत पड़ रही है।माने डॉक्टर्स की सलाह
एकॉर्ड अस्पताल के सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित मुखर्जी ने बताया कि इन दिनों उन मरीजों को अधिक दिक्कत हो रही है, जिनके फेफड़े सांस की बीमारी, टीबी या कोरोना संक्रमण के चलते कमजोर हो गए हैं। खांसी व गले में खराश के मरीज भी बढ़े हैं। इन समय जो मरीज आ रहे हैं, उन्हें खांसी व गले की समस्या ठीक होने में ज्यादा वक्त लग रहा है।
प्रदूषण का असर त्वचा को भी बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहा है। त्वचा पर जो इसका सबसे पहला असर है वह हाथ-पैर की त्वचा का रंग बदलने और उसके फटने में दिखाई देगा। डॉक्टर्स की माने तो ऐसी हालत में नाभी में रोज सरसो का तेल लगाए। वही त्वचा के फटने या बेरंग होने पर जैतून के तेल की मालिश करे।
प्रदूषण से बढ़ रही आंखों की एलर्जी इसमें ड्राई आई की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। आंख मलने से भी इन्फेक्शन हो रहा है। डॉक्टर लोगों को सलाह दे रहे हैं कि इस मौसम में बाहर जाना कम कर दें, अत्याधिक प्रदूषण वाली -जगहों पर जाने से बचें।
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