जहां एक और फरीदाबाद को स्वच्छ शहर बनाने की कोशिश की जा रही है वहीं दूसरी ओर यहां तेजी से हो रहा विस्तार और निर्माण कार्य से यहां के पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है। इस विकास कार्य में फरीदाबाद के हवा पानी तथा यहां के हरियाली को गहरा नुकसान पहुंच रहा है।

जानकारी के लिए बता दें कि सड़कों पर उड़ती धूल, हर ओर चल रहे निर्माण कार्य और हरियाली की लगातार कटौती ने लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। कई इलाकों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के चलते पेड़ों की कटाई और खुले क्षेत्रों का छोटा तथा प्रदूषित होना आम हो गया है।

मुख्य सड़कों के किनारे कतार में खुले बिल्डरों के ऑफिसों में से कई नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं। हाल ही में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (डीटीपी) विभाग ने बिना अनुमति प्लॉट बेचने के मामलों में सख्ती दिखाते हुए संबंधित बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस को पत्र भेजा है।

कभी औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले ग्रेटर फरीदाबाद में अब हालात ऐसे हैं कि पर्यावरणीय आपातकाल की स्थिति बनती जा रही है। चौड़ी सड़कों, हाई-राइज़ इमारतों और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की चमक के पीछे हवा और पानी की गुणवत्ता में लगातार गिरावट लोगों के सपनों पर भारी पड़ रही है।

फरीदाबाद को यदि स्वच्छ शहर बनाना है तो इसमें काफी बड़े बदलाव करने की आवश्यकता है। फरीदाबाद का विकास कार्य किया जा रहा है परंतु साथ ही उस हवा पानी में प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ रही है जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं तथा लोगों पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है इसलिए प्रशासन को पर्यावरण की ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।



