फरीदाबाद औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में सार्वजनिक परिवहन की हालत लगातार खराब होती जा रही है। करीब 28 लाख की आबादी वाले इस शहर में यात्रियों की आवाजाही के लिए सिर्फ 50 सिटी बसें ही चल रही हैं। ऐसे में आम लोगों को रोजाना ऑटो और निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है।

सुबह-शाम ऑफिस जाने वाले कर्मचारी और स्कूल-कॉलेज के छात्र अक्सर ऑटो में ठसाठस भीड़ के बीच सफर करने को मजबूर हैं। वहीं, रात के समय भी सार्वजनिक परिवहन की कमी के चलते लोगों को ऑटो रिक्शा का सहारा लेना पड़ता है, जो कई बार सुरक्षा जोखिम बन जाता है। खासतौर पर महिलाओं को कैब या ऑटो में सफर करने में असुरक्षा और झिझक महसूस होती है। बीते कुछ वर्षों में शहर में महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे असुरक्षा की भावना और गहरी हुई है।

जानकारी के अनुसार, पिछले पांच सालों से 100 नई सिटी बसें शुरू करने की योजना केवल फाइलों तक सीमित है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण ने शहर में इलेक्ट्रिक सिटी बसें शुरू करने से पहले बस स्टैंड निर्माण की तैयारी की थी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में 20 से अधिक बस स्टैंड बनाए जाने थे। साथ ही सेक्टर-61 में सिटी बस डिपो की योजना भी तैयार की गई थी।

अगस्त–सितंबर 2025 तक 100 नई इलेक्ट्रिक बसें मिलने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन अब तक यात्रियों की सुविधाओं के लिए बनाई गई अधिकांश योजनाएं ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।
शहरवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण जैसी समस्याएं और गंभीर हो जाएंगी। नागरिकों ने मांग की है कि शहर में सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जाए, ताकि फरीदाबाद जैसी बड़ी औद्योगिक नगरी में आवागमन सुरक्षित और सुगम बन सके।



