दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता के बीच ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का तीसरा चरण लागू कर दिया गया है। हालांकि प्रशासन की ओर से सख्त निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन फरीदाबाद में जमीनी स्तर पर पालन की तस्वीर कुछ और ही बयां करती है।

जानकारी के अनुसार, अब तक नियम तोड़ने वालों से करीब 5.5 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला जा चुका है, मगर कई स्थानों पर प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का खुलेआम उल्लंघन देखा जा रहा है। मंगलवार को शहर के विभिन्न इलाकों में सड़कों पर धूल उड़ती नजर आई और निर्माण कार्य बिना रोक-टोक जारी रहे।

ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन के आसपास बड़ी मात्रा में भवन निर्माण सामग्री खुले में रखी देखी गई। इसी तरह सेक्टर 21 में भी एक बिल्डिंग का काम पूरे जोर पर चलता रहा। मौके पर मौजूद मजदूरों ने बताया कि निर्माण कई दिनों से बिना किसी रोकावट के चल रहा है।

इसी क्रम में मेवला महाराजपुर के पास आयुष्मान आरोग्य मंदिर के ठीक सामने भी निर्माण कार्य जारी मिला, जहाँ रेत और सीमेंट खुले में बिखरे पड़े थे। इसके कारण टीकाकरण के लिए अस्पताल पहुंच रही महिलाओं, खासकर गर्भवती महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

विशेषज्ञों का कहना है कि खुले में निर्माण सामग्री रखना और सड़कों पर धूल उड़ना, दोनों ही हवा में PM-10 और PM-2.5 कणों की मात्रा बढ़ाने के प्रमुख कारण हैं। इससे न केवल वायु गुणवत्ता खराब होती है, बल्कि सांस और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
प्रशासन ने बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीज़ल वाहनों के संचालन पर दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद कई इलाकों में पुराने वाहन अब भी सड़कों पर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं। फरीदाबाद के पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि जब तक प्रशासन सख्ती से निगरानी और कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक प्रदूषण पर काबू पाना मुश्किल रहेगा।



