फरीदाबाद में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए लागू की गई पाबंदियां अब प्रभावहीन होती दिखाई दे रही हैं। शहर के कई इलाकों में बिना रोक-टोक निर्माण गतिविधियां जारी हैं, जिसके कारण वायु गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। खुले में पड़ी निर्माण सामग्री लगातार धूल उड़ाकर हवा को और दूषित कर रही है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी सोमवार के वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार, बल्लभगढ़ का AQI 203 और फरीदाबाद का 247 दर्ज किया गया। इनमें एनआईटी क्षेत्र की स्थिति सबसे खराब रही, जहां AQI 297 तक पहुंच गया। शहर के अधिकांश इलाके इस समय प्रदूषण के हॉटस्पॉट बने हुए हैं और तीनों प्रमुख क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता 200 के पार बनी हुई है।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए ग्रैप का तीसरा चरण लागू है, जिसके तहत निर्माण गतिविधियों पर सख्त पाबंदी होनी चाहिए। इसके बावजूद फरीदाबाद में कई जगह नियमों को नजरअंदाज कर निर्माण कार्य चालू है।

सेक्टर-16A में निर्माण स्थल से उड़ती धूल लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है, जबकि ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन के बाहर भी निर्माण सामग्री खुले में रखी हुई है। ग्रैप के नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि निर्माण सामग्री ढककर ही रखी जा सकती है, लेकिन इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा।
इसके अलावा हार्डवेयर चौक, एनआईटी एक मार्केट समेत कई जगहों पर तंदूर जलाए जाने की भी शिकायतें मिली हैं, जिससे प्रदूषण और बढ़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन सख्त कदम नहीं उठाए तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।



