फरीदाबाद अरावली की पहाड़ियों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। मांगर बानी लैंडस्केप—जो अपने घने जंगल, समृद्ध जैव विविधता और संवेदनशील भू-भाग के लिए जाना जाता है—अब हाई-टेक निगरानी तंत्र से लैस होने जा रहा है। वन एवं वन्यजीव विभाग ने यहां दो आधुनिक वॉच टावर स्थापित करने की मंजूरी दे दी है।

इन टावरों के चालू होने के बाद उम्मीद है कि अरावली क्षेत्र में लंबे समय से जारी अवैध खनन, अतिक्रमण और वन्यजीवों की मौत जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी। मांगर बानी को पूरे एनसीआर का ‘ग्रीन लंग्स’ माना जाता है और यह तेंदुए, नीलगाय, सियार, मोर सहित कई जीवों का महत्वपूर्ण आवागमन मार्ग भी है।

यहां 200 से ज्यादा पौधों की प्रजातियां और 90 से अधिक प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। हाल ही में अरावली क्षेत्र के पास हुए सड़क हादसे में तेंदुए की मौत और मोर के शिकार जैसी घटनाओं ने सुरक्षा को और सख्त करने की जरूरत महसूस कराई थी।
नए वॉच टावरों की बदौलत पूरे इलाके की निगरानी अब चौबीसों घंटे की जा सकेगी। एम.एस. स्टील पाइप से बने इन टावरों में कंक्रीट बेस और एम.एस. चेकर प्लेट फ्लोरिंग का उपयोग किया जाएगा, जिससे ऊंचाई पर तैनात कर्मचारी पूरे क्षेत्र का विस्तृत दृश्य आसानी से देख पाएंगे।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वॉच टावरों में तैनात कर्मियों को दूरबीन और अन्य उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनकी मदद से अवैध खनन, पेड़ कटाई, शिकार या किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी। विभाग का मानना है कि यह व्यवस्था वन्यजीवों के संरक्षण और अरावली की सुरक्षा को काफी हद तक मजबूत बनाएगी।



