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कोरोना वायरस के राज में आयुर्वेद के लिए बढ़ा विश्वास, एलोवेरा के प्रति सबसे ज्यादा रुझान

कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के चलते आम जन का विश्वास आयुर्वेद के प्रति बढ़ते हुए देखा जा सकता है। जिसके लिए लोगों ने खुद ही किचन गार्डन बनाकर अपना इलाज करना शुरू कर दिया है।

इसका अर्थ यह है कि लोग अब एलोपैथिक दवाओं या होम्योपैथिक दवाई के अलावा आयुर्वेद पर अपना भरोसा बना रहे हैं। परंतु कुछ लोग अभी भी ऐसे हैं जिन्हें आयुर्वेद पर भरोसा तो है लेकिन आयुर्वेद में उपयोग किए जाने वाले पौधों की पूर्ण जानकारी नहीं है।

कोरोना वायरस के राज में आयुर्वेद के लिए बढ़ा विश्वास, एलोवेरा के प्रति सबसे ज्यादा रुझान

ऐसे में आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि कौन सा पौधा किस रोग में लाभदायक होता है, और इसके क्या क्या फायदे हो सकते हैं। इसके लिए आपको बस सेक्टर 17 बाई पास स्थित वन विभाग की औषधि नर्सरी आना पड़ेगा।

जहां आपको औषधि पौधों के साथ लगे बोर्ड आपको यह बता देंगे कि बीमारी का इलाज किस तरह और किस पौधों की सहायता से किया जा सकता है। वही आपको बताते चलें कि कोरोना वायरस के दौर में 5 हजार पौधों की बिक्री हुई है। जिसकी तुलना पिछले साल के मुकाबले किए जाए तो इस साल के मुकाबले बेहद ज्यादा है

नर्सरी में लगे हैं 40 तरह के अलग-अलग आयुर्वेदिक पौधे

सेक्टर 17 स्थित वन विभाग की नर्सरी में गंभीर रोगों के उपचार के लिए अलग-अलग तरह के पौधे लगाए गए हैं। यहां आपको 40 तरह के अलग-अलग आयुर्वेदिक पौधे लगे हुए दिख जाएंगे।

इनमें खासतौर से ब्रह्मी बूटी टीवी के रोगी के लिए, अंतमूल, पिपलाकूल, भृंगराज, जल जमनी, बच, लेमन घास, जंगली प्याज, छुईमुई, उंचंटी, जीज पूस, काला धतूरा, पिपरमिंट, शतावर, रोशा घास, महुआ, चकोतर, सर्पगंधा, उल्ट कंबल व सिद्रोनेला शामिल है।

40 पौधों में एलोवेरा सर्वाधिक पसंदीदा पौधा

कोरोना वायरस से बचाव के लिए लोग आयुर्वेद को सर्वाधिक अपना रहे हैं। वहीं वन विभाग के अनुसार हर साल 500 से लेकर 1000 आयुर्वेदिक पौधे यहां से लोग लेकर जाते हैं ल, लेकिन इस साल 5000 पौधे 4 महीने के अंदर लोग लेकर गए हैं। सबसे ज्यादा एलोवेरा को पसंद किया जा रहा है, उसके बाद लोग लेमन घास व पत्थर चट्टा ले जा रहे हैं।

पौधों का उक्त बीमारियों में कुछ इस तरह करे इस्तेमाल

अगर आपको शुगर व गर्भाशय लोग हैं तो आप उल्ट कंबल के पत्ते रोज सुबह खा सकते हैं। मिर्गी व गले के रोग वाले लोग हथ जोड़ी के पत्तों को पीसकर चबाएं। रक्तचाप नियंत्रण करने वाले लोग सर्पगंधा के जड़ को पीसकर गोली बनाकर खाएं। उल्टी रोकने के लिए चकोतर के पत्तों को खाएं।
टीवी वाले मरीज ब्रह्मी बूटी के जड़ को सुखाने के बाद पाउडर बनाकर सेवन करें।

बिच्छू के काटने पर पीपललामून के पत्तों का रस घाव पर लगाए। पेट दर्द होने पर लेमन घास के पत्तों की चाय पिए। त्वचा रोग होने पर उंचंती के फूलों का रस त्वचा पर लगाएं कफ होने पर अकरकरा पौधे के तनो का लेप लगाएं। काला धतूरा दमा होने पर इसे जला कर राख बनाकर लगाएं जोड़ों के दर्द होने पर जर्मन चमेली का तेल निकाल कर इस्तेमाल करें।

Avinash Kumar Singh

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