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जुमला साबित हुआ नगर निगम द्वारा समाधान का दावा, सरकारी काम ने फिर चली निगम की मनमानी

आमजन को सुविधा देने के लिए सरकार से लेकर नगर निगम भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। आए दिन नगर निगम में उमड़ने वाली लोगों की समस्याओं को लेकर समाधान करने हेतु नगर निगम ने एक नई शुरुआत की थी है।

जिसके तहत अब शहर वासियों को सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और उन्हें घर बैठे ही उनकी सुविधा मुहैया हो सकेगी। परंतु आमजन के लिए यह सुविधा भी समस्या से कम साबित नहीं हो रही है।

दरसअल, निगम प्रशासन द्वारा जिस वेबसाइट के लिंक पर जाकर ऑनलाइन टैक्स जमा करने का दावा कर रहा है उस पर क्लिक करने के बाद एरर आता है। बताया जा रहा है चंडीगढ़ मुख्यालय से एरर ठीक नहीं हो पा रहा है।

इससे शहरवासियों को ऑनलाइन सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा। इसके कारण ना तो अब आमजन इस समस्या के समाधान के नगर निगम का रुख अख्तियार करने को राजी है और ना ही ऑनलाइन टैक्स जमा होने को राज़ी है।

इस मामले में शहवासियों का कहना है कि जब नगर निगम की वेबसाइट ही सालों से अपडेट नहीं हो रही है तो ऑनलाइन टैक्स भरने की सुविधा इतनी आसानी से कैसे मिल जाएगी। वही निगम कमिश्नर डॉ. यश गर्ग ने कहा कि यदि तकनीकी दिक्कत आ रही है तो उसे जल्द ठीक करा लिया जाएगा।

नगर निगम प्रशासन ने एक सप्ताह पहले प्राॅपर्टी टैक्स जमा करने के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू की है। करीब छह माह से निगम कर्मचारी और अधिकारी प्रॉपर्टी की फीडिंग कराने में जुटे रहे। इतनी मशक्कत के बाद भी इसका फायदा होता नजर नहीं आ रहा है।

आरटीआई एक्टिविस्ट रवींद्र चावला, अजय बहल एवं विष्णु गोयल का कहना है कि निगम जिस वेबसाइट की लिंक खोलकर प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने का दावा कर रहा है। उसे हम लगातार तीन चार दिन से खोलने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन हर बार डिस्प्ले पर एरर आता है।

उनका कहना है नगर निगम प्रशासन ने जल्दबाजी में ऑनलाइन पेमेंट जमा करने का दावा तो कर दिया लेकिन वेबसाइट प्रापर रन कर रही है या नहीं इसे जानने का प्रयास नहीं किया। उनका यह भी कहना है कि वर्ष 2009-10 में हुए प्रॉपर्टी सर्वे के आंकड़े को ही निगम दर्शाता है जबकि इनकी संख्या में खूब इजाफा हुआ है।

निगम के जनसम्पर्क अधिकारी रतनलाल रोहिल्ला का कहना है कि प्रॉपर्टी टैक्स ऑनलाइन जमा कराने के लिए मालिक को किसी भी आनलाइन ब्राउजर में www.ulbharyana.gov.in डालेंगे तो शहरी स्थानीय निकाय विभाग की वेबसाइट खुल जाएगी।

इस पर बायें हाथ पर नीले रंग में उल्लेखित विकल्पों में से प्रॉपर्टी टैक्स एंड फायर टैक्स का विकल्प चयन करना पड़ेगा। उसके बाद लाल स्टार से दर्शित अनिवार्य विकल्प भर कर अपनी प्रॉपर्टी आईडी भरना पड़ेगा। रोहिला का कहना है यदि किसी करदाता को अपनी प्रॉपर्टी आईडी मालूम नहीं है तो ऐसे करदाता नाम या मकान नंबर आदि में से कोई एक विकल्प डाल कर अपनी प्रॉपर्टी को ढूंढ सकते हैं।

वेबसाइट शुरू करने से पहले देनी होगी यह जानकारी

वेबसाइट में सबसे पहले म्यूनिसिपल टाइप फिर जोन का नाम, प्राॅपर्टी आईडी,ऑनर नेम, प्रॉपर्टी नंबर अथवा हाउस नंबर, म्यूनिसिपल नाम, कॉलोनी का नाम, पुरानी प्रॉपर्टी आईडी और पिता का नाम भरना होगा। इसके बाद सर्च के विकल्प पर क्लिक करना होगा।

निगम कमिश्नर डाॅ. यश गर्ग का कहना है कि हरियाणा सरकार ने 20 मई को जारी नीति के तहत जिन संपत्ति करदाताओं ने पिछले तीन सालों में प्रत्येक वर्ष अपना संपत्ति कर निर्धारित तिथि 31 जुलाई से पहले जमा करवाया है उन्हें 10 प्रतिशत अतिरिक्त छूट देने,

वर्ष 2010-11 से लेकर वर्ष 2016-17 तक के बकाया मूल संपत्ति कर पर 25 प्रतिशत की छूट देने और एकमुश्त बकाया संपत्ति कर की अदायगी करने पर संपूर्ण ब्याज की राशि माफ किए जाने का प्रावधान किया है। लेकिन यह सभी छूट 31 अक्टूबर तक सम्पत्ति कर जमा करने वाले करदाताओं को ही मिलेगी

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